
छत्तीसगढ़ में धान और अन्न के दान का सबसे बड़ा लोकपर्व छेरछेरा पुन्नी आज पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व पौष पूर्णिमा और शांकभरी जयंती के नाम से भी जाना जाता है। वर्षों से चली आ रही यह पारंपरिक परंपरा वर्ष की शुरुआत में मनाई जाती है और इसका छत्तीसगढ़ी संस्कृति में विशेष महत्व है।
छेरछेरा पुन्नी की खास बात यह है कि इस दिन रुपए-पैसे का नहीं, बल्कि अन्न का दान किया जाता है। लोग घर-घर जाकर धान, चावल और अन्य अनाज दान करते हैं। इस लोकपर्व में आम जनता के साथ-साथ सरकार भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है और सामाजिक समरसता का संदेश दिया जाता है।




