
छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक बार फिर जंगलों से उम्मीद की आहट सुनाई दे रही है। दशकों के लंबे अंतराल के बाद राष्ट्रीय पशु बाघ की मौजूदगी के संकेत मिलने से न केवल वन विभाग, बल्कि पूरा बस्तर संभाग सतर्क और उत्साहित है। कभी बाघों का मजबूत गढ़ रहा बस्तर, अब फिर से उसी पहचान की ओर लौटता हुआ नजर आ रहा है।
संभाग मुख्यालय जगदलपुर से लगे जंगलों में, भानपुरी और मारेंगा बायपास क्षेत्र के आसपास बाघ के ताज़ा पगमार्क पाए गए हैं। वन विभाग के अनुसार, इन निशानों के साथ एक शावक का पगमार्क भी मिला है, जिसने उम्मीदों को और मजबूत कर दिया है।
वन अधिकारियों का मानना है कि यह बाघ संभवतः नए शिकार क्षेत्र और सुरक्षित आवास की तलाश में इस इलाके तक पहुंचा है। पगमार्क मिलने के बाद संबंधित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और स्थानीय ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
बस्तर के जंगलों में बाघ की वापसी को पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है। यदि यह उपस्थिति स्थायी रहती है, तो आने वाले समय में बस्तर एक बार फिर बाघ संरक्षण के नक्शे पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज करा सकता है।




