September 4, 2026

माता-पिता का साया उठा तो नशे की गिरफ्त में आया 10 साल का बच्चा, पुलिस ने संवेदनशील पहल से बदली जिंदगी की राह

राजनांदगांव। हाई स्कूल ग्राउंड में बच्चों के बीच हुई झड़प के बाद पुलिस के सामने पहुंचे 10 वर्षीय बालक की कहानी ने पुलिस अधिकारियों को भी भावुक कर दिया। कम उम्र में ही पिता को खो चुके इस बच्चे की मां भी उसे छोड़कर चली गई थी। माता-पिता का साया उठने के बाद बच्चा अकेलेपन और नशे की गिरफ्त में चला गया था। मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देश पर उसे नशामुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया।

दरअसल, 9 अगस्त की शाम हाई स्कूल ग्राउंड में बच्चों के बीच विवाद हुआ था। मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद बालक को नियमानुसार पुलिस अभिरक्षा में लिया गया। पुलिस अधिकारियों ने जब उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी जुटाई तो सामने आया कि वह बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था।

बताया गया कि कई साल पहले एक हत्या की घटना में बालक ने अपने पिता को खो दिया था। इसके बाद मां के चले जाने से वह पूरी तरह अकेला पड़ गया। देखरेख और सहारे के अभाव में उसने नशे का सहारा लेना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसका व्यवहार भी प्रभावित होने लगा और छोटी-छोटी बातों पर विवाद करने लगा।

एसपी ने दिए संवेदनशील पहल के निर्देश

मामला पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने इसे केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा। एसपी ने बालक के भविष्य और उसके सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

उनके निर्देश पर डोंगरगढ़ थाना प्रभारी, प्रशिक्षु डीएसपी सुमन जायसवाल और पुलिस टीम ने बालक को बाल कल्याण समिति, राजनांदगांव के समक्ष पेश किया। समिति के सामने उसकी काउंसलिंग कराई गई और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।

रायपुर के नशामुक्ति केंद्र में कराया दाखिला

बालक को नशे की लत से बाहर निकालने और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रायपुर स्थित नई उम्मीद नशामुक्ति केंद्र में उसका दाखिला कराया गया। डोंगरगढ़ पुलिस की टीम स्वयं बच्चे को केंद्र तक लेकर गई और वहां सुरक्षित रूप से सुपुर्द किया।

पुलिस की इस पहल को बाल संरक्षण की दिशा में संवेदनशील कदम माना जा रहा है। कार्रवाई को केवल विवाद और कानूनी प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय पुलिस ने बच्चे की परिस्थितियों को समझते हुए उसके पुनर्वास और भविष्य को प्राथमिकता दी।

अब 10 वर्षीय बालक को सुरक्षित माहौल में नशे से बाहर आने और सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर मिलेगा।