रायपुर। छत्तीसगढ़ में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के त्वरित हस्तक्षेप के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन और स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) की संयुक्त टीम ने महज डेढ़ घंटे के भीतर बस को रोककर बच्चों को मुक्त कराया। मामले में एक नियोक्ता को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है।
सूचना मिलते ही शुरू हुआ रेस्क्यू अभियान

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा को 5 अगस्त की शाम सूचना मिली थी कि रायपुर से कुछ बच्चों को बस के जरिए बाल श्रम के लिए ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही आयोग ने तत्काल स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट और चाइल्ड हेल्पलाइन से संपर्क कर संयुक्त अभियान शुरू कराया।
करीब डेढ़ घंटे की कार्रवाई के बाद टीम ने बस को रोककर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
बस में मिले 16 बच्चे, 7 नाबालिग
रेस्क्यू के दौरान बस में कुल 16 बच्चे मिले, जिनमें 7 बच्चे 14 से 16 वर्ष आयु वर्ग के नाबालिग हैं। सभी बच्चे बैगा जनजाति से हैं और राजनांदगांव तथा कबीरधाम जिले के निवासी बताए गए हैं।
रेस्क्यू के बाद सभी बच्चों को सुरक्षित बाल आश्रय गृह भेजा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग और देखभाल की जा रही है।
मशरूम फैक्ट्री में काम कराने ले जाया जा रहा था
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बच्चों को कचन्दूर स्थित मॉडर्न एग्रो मशरूम में काम कराने के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था। मामले में नियोक्ता लक्ष्मण पटेल को गिरफ्तार कर लिया गया है।
आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143(2), 143(3), 143(5) और 111(1) के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
नेटवर्क की भी होगी जांच
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। बाल श्रम, बाल तस्करी और बच्चों के शोषण के मामलों में आयोग जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई करता है।
उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
1098 पर सूचना देने की अपील
आयोग ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल श्रम या बाल तस्करी से जुड़ी कोई जानकारी मिले तो तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या संबंधित विभाग को सूचना दें, ताकि समय रहते बच्चों को सुरक्षित बचाया जा सके।





