January 16, 2026

जगदलपुर में SIR से सियासी घमासान: 22 हजार मतदाता C कैटेगरी में, 17 हजार शहरी मतदाताओं को नोटिस

जगदलपुर | छत्तीसगढ़ न्यूज़
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र में चल रही मतदाता सूची की जांच ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। प्रशासनिक जांच में 22 हजार मतदाताओं के नाम C कैटेगरी में डाले गए हैं, जिसके बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं।

🏙️ शहरी मतदाता सबसे ज्यादा प्रभावित

इस पूरे मामले में चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि C कैटेगरी में शामिल 22 हजार मतदाताओं में से 17,093 मतदाता केवल शहरी इलाकों से हैं। इन मतदाताओं पर आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान उन्होंने वर्ष 2003 की मतदाता सूची से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।

📄 2003 की मतदाता सूची का प्रमाण मांगा

जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से ऐसे सभी मतदाताओं को नोटिस जारी कर 2003 की मतदाता सूची से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार मतदाता अन्य वैकल्पिक वैध दस्तावेज भी प्रस्तुत कर सकते हैं, जिससे उनकी पात्रता सिद्ध हो सके।

🟠 कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि

  • मतदाताओं को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है,
  • वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद BLO द्वारा दस्तावेज खारिज किए जा रहे हैं,
  • यह प्रक्रिया मतदाताओं को डराने और वोटर लिस्ट से नाम हटाने की साजिश है।

🔵 भाजपा ने आरोपों को किया खारिज

वहीं भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए SIR प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और लोकतंत्र को मजबूत करने वाली बताया है।
भाजपा संगठन की ओर से कहा गया कि पार्टी जगदलपुर शहर के 48 वार्डों में मतदाता सत्यापन में सक्रिय भूमिका निभा रही है और इसका उद्देश्य केवल वास्तविक मतदाताओं को सूची में बनाए रखना है।

⚖️ प्रशासन पर भी उठे सवाल

मतदाता सूची के इस विशेष पुनरीक्षण ने

  • प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है,
  • आम मतदाताओं में असमंजस और चिंता बढ़ा दी है,
  • और राजनीतिक दलों के बीच टकराव को और तेज कर दिया है।

🔎 आगे और बढ़ सकता है विवाद

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में SIR और C कैटेगरी मतदाताओं का मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। यदि समय रहते स्पष्ट दिशा-निर्देश और पारदर्शी समाधान नहीं निकाला गया, तो यह मामला चुनावी बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है।