March 4, 2026

24,752 किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ, अब खेती हुई आसान और मुनाफेदार

रायपुर, 09 फरवरी 2026

छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं से प्रदेश के किसान आधुनिक खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड के माध्यम से किसानों को शासकीय अनुदान पर आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे खेती की लागत कम हो रही है और उत्पादन बढ़ रहा है। इससे खेती अब अधिक आसान और मुनाफेदार बन गई है तथा किसान आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

चैम्पस पोर्टल से मिल रहे आधुनिक यंत्र

बीज निगम द्वारा चैम्पस पोर्टल के माध्यम से जुताई, बुआई, रोपाई और कटाई के लिए आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें रोटावेटर, स्वचालित रीपर, पैडी ट्रांसप्लांटर, लेजर लैंड लेवलर, पावर वीडर, मल्चर, थ्रेशर, सीड ड्रिल तथा ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली शामिल हैं।

विभिन्न योजनाओं से 24,752 किसान लाभान्वित

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में बीज निगम द्वारा —

  • यंत्रीकरण सबमिशन (कंपोनेंट-1) अंतर्गत 912 किसान,
  • शाकंभरी योजना अंतर्गत 3,375 किसान,
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (ड्रिप) अंतर्गत 3,821 किसान,
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (स्प्रिंकलर) अंतर्गत 16,644 किसान
    को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराकर लाभान्वित किया गया है।

कम लागत, अधिक उत्पादन

इन आधुनिक यंत्रों से किसानों की मेहनत कम हुई है और समय की बचत के साथ उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है। जहां पहले अधिक मजदूरी और लागत लगती थी, वहीं अब कम खर्च में अधिक लाभ मिल रहा है।

बस्तर संभाग में भी बदली तस्वीर

प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों, विशेषकर बस्तर संभाग में किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाकर बेहतर परिणाम प्राप्त कर रहे हैं। धान के साथ अब सब्जी उत्पादन और उद्यानिकी फसलों की ओर भी किसान तेजी से बढ़ रहे हैं। ड्रिप सिंचाई से किसान स्थानीय के साथ बाहरी बाजारों में भी उत्पाद बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

किसानों ने साझा किया अनुभव

बिलासपुर के किसान नारायण दल्लू पटेल ने बताया कि स्वचालित रीपर से एक एकड़ फसल की कटाई 2 से 3 घंटे में हो जाती है, जबकि पहले पूरा दिन लग जाता था। इससे लागत में 50 से 60 प्रतिशत तक कमी आई है।

रायपुर के किसान हीरालाल धनुराम साहू ने कहा कि रोटावेटर से खेत कुछ ही घंटों में तैयार हो जाता है और उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत वृद्धि हुई है।

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के किसान लेखूराम कैलाश छेदइया ने बताया कि सीड ड्रिल से बोआई करने पर बीज की 15 से 25 प्रतिशत बचत और उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत वृद्धि हुई है।

आत्मनिर्भर किसान की ओर कदम

बीज निगम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। निगम की इस पहल से प्रदेश के किसान तकनीकी रूप से सशक्त होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत बन रहे हैं और विकसित भारत की परिकल्पना को साकार कर रहे हैं।