रायपुर। सहकारी गृह निर्माण समितियों को करोड़ों रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाने और 20 लाख रुपए से अधिक के गबन के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी ने तत्कालीन वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक (परिसमापक) राजकुमार नायडू के खिलाफ विशेष न्यायालय में 3500 पन्नों का चालान पेश किया है।
जानकारी के मुताबिक, राजकुमार नायडू के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(सी)(डी) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। विस्तृत जांच के बाद एसीबी ने न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।
भूखंडों के पंजीयन निरस्त कर किया अवैध विक्रय
जांच में सामने आया कि भैरव गृह निर्माण समिति और राष्ट्रीय खनिज विकास निगम गृह निर्माण समिति, रायपुर में परिसमापक के पद पर रहते हुए आरोपी ने निर्धारित प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य किए। आरोप है कि उसने समिति के सदस्यों को आबंटित और पंजीकृत 13 भूखंडों का पंजीयन निरस्त करवाकर नए सदस्य बनाते हुए उन्हें कलेक्टर दर से कम कीमत पर बेच दिया।
सड़क के लिए आरक्षित भूमि भी बेचने का आरोप
एसीबी की जांच में यह भी सामने आया कि समिति की सड़क और रास्ते के लिए आरक्षित भूमि को भी नियमों के विपरीत बेच दिया गया, जिससे समितियों को करोड़ों रुपए की आर्थिक क्षति हुई।
एक ही परिवार को तीन भूखंड आबंटित
भैरव गृह निर्माण समिति में आरोपी ने नियमों को दरकिनार करते हुए एक ही परिवार के तीन सदस्यों को भूखंड आबंटित कर पंजीयन कराया। वहीं एक सदस्य से विक्रय राशि प्राप्त करने के बाद उसी भूखंड का दूसरे व्यक्ति के नाम पंजीयन कराने का भी आरोप है।
बैंक खातों से निकाली रकम, निजी उपयोग का आरोप
विवेचना में यह तथ्य भी सामने आया कि भूखंड विक्रय से प्राप्त राशि और निलंबन अवधि के बाद समिति के खातों से निकाली गई रकम का उपयोग आरोपी ने निजी खर्चों में किया। जांच में 20 लाख रुपए से अधिक के गबन की पुष्टि हुई है।
4 करोड़ से अधिक की क्षति का दावा
एसीबी के अनुसार, राजकुमार नायडू की कथित अनियमितताओं से दोनों सहकारी समितियों को लगभग 4 करोड़ रुपए से अधिक की आर्थिक क्षति हुई, जबकि 20 लाख रुपए से अधिक की राशि का गबन कर निजी उपयोग किया गया। मामले में अब विशेष न्यायालय में आगे की सुनवाई होगी।





