March 4, 2026

45 साल बाद छत्तीसगढ़ में नगर निकायों का आय आधारित वर्गीकरण, शासन ने बदले नियम

रायपुर:
छत्तीसगढ़ में लगभग 45 वर्षों बाद नगर पालिक परिषदों और नगर पंचायतों का आय-आधारित वर्गीकरण किया गया है। राज्य शासन ने इस संबंध में बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए छत्तीसगढ़ नगरपालिका सेवा (वेतनमान एवं भत्ते) नियम, 1967 में संशोधन किया है। इसके तहत नियम–3 को प्रतिस्थापित करते हुए नगरीय निकायों की श्रेणियां अब उनकी वार्षिक आय के आधार पर तय की जाएंगी।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह वर्गीकरण नगर निकायों की वास्तविक आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर किया गया है।

1980 के बाद पहली बार बदली व्यवस्था

गौरतलब है कि इससे पहले नगर निकायों का ऐसा वर्गीकरण वर्ष 1980 में किया गया था। करीब 45 साल बाद राज्य सरकार ने बदलते आर्थिक परिदृश्य के अनुरूप नई श्रेणियां तय की हैं, जिससे शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय क्षमता के अनुसार प्रशासनिक ढांचा मजबूत किया जा सके।

ये होंगी नई श्रेणियां

🔹 श्रेणी “क”

वे नगर पालिक परिषदें/नगर पंचायतें जिनकी वार्षिक आय 4 करोड़ रुपये या उससे अधिक होगी।

🔹 श्रेणी “ख”

वे निकाय जिनकी वार्षिक आय 2 करोड़ रुपये या उससे अधिक लेकिन 4 करोड़ से कम होगी।

🔹 श्रेणी “ग”

वे निकाय जिनकी वार्षिक आय 90 लाख रुपये या उससे अधिक लेकिन 2 करोड़ रुपये से कम होगी।

🔹 श्रेणी “घ”

वे निकाय जिनकी वार्षिक आय 90 लाख रुपये से कम होगी।

वार्षिक आय की स्पष्ट परिभाषा

अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी नगर पालिक परिषद या नगर पंचायत की समस्त वार्षिक आय को उसकी आय माना जाएगा, हालांकि कुछ विशेष प्रयोजनों के लिए मिलने वाले सहायता अनुदान इसमें शामिल नहीं किए जाएंगे।

प्रशासनिक व्यवस्था होगी अधिक व्यावहारिक

सरकार के इस फैसले से नगर निकायों का वर्गीकरण अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक होगा। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतनमान, भत्तों और प्रशासनिक ढांचे में एकरूपता आएगी। साथ ही निकायों के वित्तीय प्रदर्शन के अनुसार बेहतर नियोजन संभव होगा।

शहरी प्रशासन को मिलेगी मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय छत्तीसगढ़ के शहरी स्थानीय निकायों के संचालन में स्पष्टता, अनुशासन और वित्तीय संतुलन लाने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे नगरीय प्रशासन अधिक सक्षम और परिणामोन्मुख बनेगा।

छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम शहरी विकास को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।