March 3, 2026

Ajit Pawar–Sharad Pawar: अजित पवार के निधन के बाद भावुक हुआ पवार परिवार, NCP विलय पर बड़ी अपडेट

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा और भावनात्मक मोड़ देखने को मिल रहा है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार के दर्दनाक प्लेन एक्सीडेंट में निधन के बाद पूरा पवार परिवार एक-दूसरे के करीब आता नजर आ रहा है। अंत्येष्टि के दौरान पवार परिवार के सभी सदस्य मौजूद रहे और एक-दूसरे को ढांढस बंधाते दिखे।

इधर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों की नजर अब वरिष्ठ नेता शरद पवार के मार्गदर्शन पर टिकी हुई है। इसी बीच NCP के विलय को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है।


NCP के दोनों गुटों के विलय पर बनी थी सहमति

NCP सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार और शरद पवार के बीच पार्टी के दोनों गुटों को एकजुट करने को लेकर सहमति बन चुकी थी। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद विलय की रूपरेखा तय कर ली गई थी और इसकी घोषणा 8 फरवरी को करने की तैयारी थी।

हालांकि, इससे पहले ही बारामती के पास हुए दर्दनाक विमान हादसे में अजित पवार का निधन हो गया और यह प्रक्रिया अधूरी रह गई।


हादसे से पहले हुई थी अहम बैठक

सूत्र बताते हैं कि विमान हादसे से कुछ दिन पहले ही अजित पवार और शरद पवार के बीच लंबी बातचीत हुई थी। इस बातचीत में NCP के दोनों गुटों को एक करने पर सहमति बनी थी। इसके बाद वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक हुई, जिसमें आगे की राजनीतिक प्रक्रिया और रणनीति पर चर्चा की गई थी।

योजना थी कि जिला परिषद चुनाव के तुरंत बाद विलय का ऐलान किया जाएगा, ताकि पार्टी को नई मजबूती दी जा सके।


शरद पवार के सामने फिर बड़ी चुनौती

अजित पवार के निधन से पवार परिवार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। 85 वर्षीय शरद पवार के सामने अब एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी खड़ी हो गई है।

साल 2023 में अलग रास्ता चुनने वाले भतीजे अजित पवार अब हमेशा के लिए उनसे दूर हो चुके हैं। ऐसे में पार्टी और परिवार की बिखरी कड़ियों को जोड़ने की जिम्मेदारी फिर शरद पवार के कंधों पर आ गई है।


महाराष्ट्र की नजर पवार परिवार के फैसलों पर

अब सवाल यह है कि आगे NCP की दिशा क्या होगी।
शरद पवार के साथ-साथ प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, सुप्रिया सुळे, जयंत पाटील और शशिकांत शिंदे क्या रणनीति बनाते हैं, इस पर पूरे महाराष्ट्र की राजनीति की नजर टिकी हुई है।

पवार परिवार का अगला फैसला सिर्फ पार्टी ही नहीं, बल्कि राज्य की सत्ता की राजनीति को भी नई दिशा दे सकता है।