रायपुर। आज जब बस्तर नक्सलियों से कमोबेश मुक्त हो चुका है, तब 14 साल पहले की एक सनसनीखेज घटना याद आती है, जब सुकमा के तत्कालीन कलेक्टर और IAS अधिकारी एलेक्स पॉल मेनन का माओवादियों ने अपहरण कर लिया था। यह घटना उस दौर में बस्तर में नक्सलियों की मजबूत पकड़ को दर्शाती है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर तक सुर्खियां बटोरी थीं।

2006 बैच के IAS अधिकारी एलेक्स पॉल मेनन अपनी कार्यशैली के लिए जाने जाते थे। वे बिना किसी भय और सुरक्षा के दुर्गम आदिवासी इलाकों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनते थे। उनका मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ गांव-गांव तक पहुंचाना था। उन्होंने कई बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू करवाने में भी अहम भूमिका निभाई।

शादी के महज तीन हफ्ते बाद ही उनकी पोस्टिंग नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में कलेक्टर के रूप में हो गई थी। बावजूद इसके वे बिना समय गंवाए बस्तर पहुंच गए और अपने काम में जुट गए।
21 अप्रैल 2012 को सुकमा जिले के माझीपारा गांव में एक बैठक में शामिल होने पहुंचे मेनन का माओवादियों ने अपहरण कर लिया। इस दौरान उनके साथ मौजूद दो सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी गई थी। अपहरण के बाद उन्हें जंगल के भीतर ले जाया गया, जिससे पूरे राज्य और देश में हड़कंप मच गया।

घटना के बाद राज्य सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वार्ता प्रक्रिया शुरू की और एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया। कई दिनों तक चली बातचीत और मध्यस्थों के प्रयासों के बाद आखिरकार 12 दिन की कैद के बाद मेनन को रिहा किया गया। उन्हें ताड़मेटला में मध्यस्थ बी.डी. शर्मा और प्रो. जी. हरगोपाल को सौंपा गया।
यह घटना आज भी बस्तर के नक्सल प्रभावित दौर की एक अहम याद के रूप में देखी जाती है, जो उस समय की चुनौतियों और प्रशासन की स्थिति को उजागर करती है।





