जगदलपुर। दंतेवाड़ा जिले की अलनार लौह अयस्क खदान एक बार फिर विवादों में घिर गई है। बस्तरिया राज मोर्चा ने खदान संचालक कंपनी पर बड़े पैमाने पर खनन घोटाले का आरोप लगाते हुए किरंदुल थाने में शिकायत दर्ज कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिकायत के बाद मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है।
मोर्चा के पदाधिकारियों का आरोप है कि पिछले करीब नौ वर्षों के दौरान खदान में वास्तविक रूप से कोई खनन गतिविधि नहीं हुई, इसके बावजूद रिकॉर्ड में लगभग 2 लाख 72 हजार टन लौह अयस्क के उत्पादन और परिवहन का उल्लेख किया गया है। संगठन का दावा है कि यह पूरा मामला फर्जी दस्तावेजों, ट्रांजिट पास और कागजी परिवहन के जरिए अंजाम दिया गया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि खदान संचालन से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर कर शासन और संबंधित विभागों को गुमराह किया गया। मोर्चा का कहना है कि यदि खदान में वास्तविक खनन नहीं हुआ तो फिर लाखों टन लौह अयस्क के उत्पादन और परिवहन का रिकॉर्ड कैसे तैयार किया गया, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
बस्तरिया राज मोर्चा ने मामले को केवल खनन अनियमितता तक सीमित नहीं बताया है। संगठन का आरोप है कि खदान संचालन के दौरान पेसा कानून, वन अधिकार अधिनियम और ग्राम सभा के अधिकारों की भी अनदेखी की गई। साथ ही स्थानीय आदिवासी युवाओं को रोजगार देने के दावों को भी पूरा नहीं किया गया।
मोर्चा ने कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और शासन को गलत जानकारी देने जैसी गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल आर्थिक अनियमितता का मामला है, बल्कि आदिवासी अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग से भी जुड़ा गंभीर विषय है।
वहीं, शिकायत के बाद पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है। संगठन ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की भी मांग उठाई है।
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि खदान में वर्षों से खनन नहीं हुआ, तो लाखों टन लौह अयस्क उत्पादन और परिवहन का रिकॉर्ड किस आधार पर तैयार किया गया। शिकायत सामने आने के बाद दंतेवाड़ा जिले में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है और सभी की नजरें प्रशासनिक जांच तथा आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।





