नई दिल्ली। रामअवतार जग्गी हत्याकांड मामले में उम्रकैद की सजा पाए पूर्व विधायक अमित जोगी की याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में उनकी ओर से दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर विचार किया गया।
पहली याचिका हाईकोर्ट के आदेश के तहत सरेंडर पर रोक लगाने से संबंधित थी, जिसे चैंबर में दाखिल किया गया था, जबकि दूसरी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की दो नंबर बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों मामलों को एक साथ टैग करते हुए 23 अप्रैल को संयुक्त सुनवाई की तारीख तय कर दी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सरेंडर से जुड़ी किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत नहीं दी जाएगी। साथ ही कहा कि इस संबंध में निर्णय चैंबर जज द्वारा लिया जाएगा। कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए अगली सुनवाई तक स्थिति यथावत रखने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान मृतक रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी की ओर से भी वकील उपस्थित रहे और उन्होंने अपना पक्ष रखा।
अमित जोगी ने क्या कहा?
सुनवाई के बाद अमित जोगी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके दोनों मामलों को एक साथ जोड़ दिया है। इनमें 25 मार्च 2026 के लीव टू अपील आदेश के खिलाफ दायर एसएलपी और 2 अप्रैल 2026 के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ वैधानिक अपील शामिल है। उन्होंने कहा कि अब इन दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।
अमित जोगी ने अपनी कानूनी टीम का भी जिक्र किया, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा, सिद्धार्थ दवे और शशांक गर्ग शामिल रहे। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से कुछ सरकारी गवाह बन गए थे।
रायपुर की विशेष अदालत ने 31 मई 2007 को अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, लेकिन इस फैसले के खिलाफ सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को हाईकोर्ट भेज दिया था, जहां से यह मामला फिर शीर्ष अदालत पहुंचा।
अब इस बहुचर्चित हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।





