छत्तीसगढ़।
आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में नए भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के पास भवन नहीं थे या जो जर्जर हालत में थे, उन्हें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना और महिला एवं बाल विकास विभाग के अभिसरण से नए भवन स्वीकृत किए गए थे।
जिले में कुल 393 आंगनबाड़ी भवनों की स्वीकृति मिली थी। वर्ष 2024 में स्वीकृत इन भवनों में से 343 के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग से 1.69 लाख रुपये और डीएमएफ से 50 भवनों के लिए राशि उपलब्ध कराई गई थी।
हालांकि, कई ग्राम पंचायतों द्वारा निर्माण कार्य समय पर शुरू नहीं करने पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। एक साल बीतने के बाद भी काम शुरू नहीं होने पर 26 आंगनबाड़ी भवनों की स्वीकृति निरस्त कर दी गई और उन्हें अन्य पंचायतों को आवंटित किया गया।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनय अग्रवाल ने बताया कि सरपंचों और सचिवों को लगातार समय दिया गया, बावजूद इसके उदासीनता बरती गई। उन्होंने कहा कि राशि की कोई कमी नहीं थी, फिर भी निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया, इसलिए कार्रवाई जरूरी हुई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी एजेंसी को स्वीकृति मिलने के एक सप्ताह के भीतर कार्य प्रारंभ करना होगा और 3 से 6 माह के भीतर पूर्ण करना अनिवार्य रहेगा। तय समय पर कार्य शुरू नहीं होने पर स्वीकृति निरस्त कर अन्य पंचायतों को दी जाएगी।
चार चरणों में इन भवनों को निरस्त किया गया। इसके बाद विकासखंड अंबिकापुर, लखनपुर और लुण्ड्रा की ग्राम पंचायतों को नए आंगनबाड़ी भवनों की स्वीकृति दी गई है।
प्रशासन का कहना है कि आंगनबाड़ी भवन बच्चों के भविष्य से जुड़े हैं, इसलिए निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।




