July 23, 2026

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की साड़ी खरीद में बड़ा बदलाव, अब राशि सीधे खाते में भेजेगी सरकार

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की साड़ी खरीद व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब केंद्रीकृत खरीद प्रणाली को समाप्त कर साड़ी खरीद के लिए निर्धारित राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुसार स्थानीय स्तर पर साड़ी का चयन और खरीद सकेंगी। विभाग के अनुसार हाल ही में साड़ी खरीद प्रक्रिया को लेकर प्राप्त सुझावों और सामने आए मुद्दों के परीक्षण के बाद यह निर्णय लिया गया है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री Laxmi Rajwade ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की सोच के अनुरूप शासन की योजनाओं में अधिकतम राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे हितग्राहियों तक पहुंचाई जा रही है। इससे बिचौलियों और अनावश्यक प्रक्रियाओं की भूमिका समाप्त होगी तथा व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में राज्य में तकनीक आधारित और पारदर्शी प्रशासन को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा यह निर्णय उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

विभागीय निर्देशों के अनुसार साड़ी का डिजाइन पूर्ववत रखा जाएगा, लेकिन अंतिम स्वरूप आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से परामर्श के बाद तय किया जाएगा। साड़ी के रंग और डिजाइन संबंधी जानकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं कपड़े के प्रकार जैसे कॉटन या सिंथेटिक का चयन लाभार्थी स्वयं स्थानीय स्तर पर कर सकेंगी।

मंत्री ने कहा कि विभाग में वर्षों से चली आ रही व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है और जहां भी आवश्यकता होगी, हितग्राहियों के हित में सुधार किए जाएंगे। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के सम्मान और सुविधा को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म प्रदान करने का प्रावधान है, जिसमें प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि निर्धारित की गई है।

सरकार का मानना है कि इस निर्णय से लाभार्थियों को सीधे आर्थिक लाभ मिलने के साथ-साथ खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और चयन की स्वतंत्रता भी सुनिश्चित होगी।