May 13, 2026

तैराकी चुनी और इतिहास रच दिया: अंजलि मुंडा बनीं खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की पहली महिला स्वर्ण विजेता

Raipur | 26 मार्च 2026

रायपुर। कभी-कभी जीवन की दिशा एक छोटे से निर्णय से बदल जाती है, और ओडिशा की 15 वर्षीय अंजलि मुंडा की कहानी इसका सटीक उदाहरण है।

वर्ष 2022 में स्कूल में खेल चयन के दौरान उन्होंने तैराकी को चुना—एक ऐसा खेल जिसे वे उस समय केवल मनोरंजन के रूप में जानती थीं। आज वही निर्णय उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक उपलब्धि दिला चुका है।

खेलो इंडिया में रचा इतिहास

ओडिशा के जाजपुर जिले के गहिरागड़िया गांव की रहने वाली अंजलि ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में 200 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में 2:39.02 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

इसके साथ ही वे इस प्रतियोगिता की पहली महिला स्वर्ण पदक विजेता बन गईं।

साधारण परिवार, बड़ा सपना

अंजलि चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके पिता एक स्थानीय फैक्ट्री में वैन चालक हैं। 10 साल की उम्र में वे कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से जुड़ीं, जहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा और खेल प्रशिक्षण मिला।

यहीं से उनके खेल करियर की मजबूत नींव पड़ी।

बहन से प्रेरणा, खुद चुना रास्ता

शुरुआत में वे अपनी बड़ी बहन से प्रेरित थीं, जो तीरंदाजी में सक्रिय हैं, लेकिन अंजलि ने तैराकी को अपना लक्ष्य बनाया।

तैराकी शुरू करने के एक साल के भीतर ही उन्होंने स्थानीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था।

‘अस्मिता लीग’ से बढ़ा आत्मविश्वास

अंजलि अपनी सफलता का श्रेय कोचों और खेल मंत्रालय की ‘अस्मिता लीग’ पहल को देती हैं।
साल 2024 में संबलपुर में आयोजित प्रतियोगिता में उन्होंने दो रजत पदक जीते। इसके बाद गुवाहाटी में आयोजित ईस्ट जोन स्विमिंग लीग में भी उन्होंने दो रजत पदक हासिल किए।

अब नजर अगले इवेंट पर

अंजलि अब 50 मीटर बैकस्ट्रोक, 100 मीटर बैकस्ट्रोक और 200 मीटर इंडिविजुअल मेडली में बेहतर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही हैं।

उनका लक्ष्य अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय 2:25 को और बेहतर करना है।

अंजलि मुंडा की यह उपलब्धि बताती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर प्रतिभा किस तरह नई ऊंचाइयों को छू सकती है।