May 18, 2026

आरंग में अवैध प्लाटिंग का खेल तेज, प्रशासन पर “मौन संरक्षण” के आरोप

आरंग। नगर पालिका क्षेत्र में इन दिनों अवैध निर्माण और प्लाटिंग का खेल तेजी से फैलता नजर आ रहा है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियम-कायदों को ताक पर रखकर प्रभावशाली लोगों और भू-माफियाओं को खुली छूट दी जा रही है, जबकि आम नागरिकों पर सख्ती बरती जा रही है।

जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक 01, 02, 06, 13, 15, 16 और 17 में बड़े पैमाने पर अवैध प्लाटिंग और जमीन की खरीदी-बिक्री जारी है। आरोप है कि शासकीय जमीनों तक का सौदा खुलेआम हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि जहां पहले तकनीकी कारणों का हवाला देकर निर्माण कार्यों पर रोक लगाई गई थी, वहीं अब अचानक कई जगहों पर निर्माण शुरू हो गया है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका प्रशासन दोहरी नीति अपना रहा है। बड़े रसूखदारों को जहां अप्रत्यक्ष संरक्षण मिल रहा है, वहीं छोटे मकान बनाने वाले गरीब परिवारों के काम मामूली खामियों पर भी रुकवा दिए जाते हैं। इससे लोगों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, कई अवैध कॉलोनियों में बिना ले-आउट पास कराए और बिना मूलभूत सुविधाओं के वादे के साथ प्लॉट बेचे जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि निर्माण के लिए NOC देने और टैक्स लगाने के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। हालांकि, प्रशासन इन आरोपों से इनकार कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना प्रशासनिक मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर अवैध प्लाटिंग संभव नहीं है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ सकता है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
मुख्य नगर पालिका अधिकारी शीतल चंद्रवंशी ने बताया कि अवैध प्लाटिंग के 19 मामलों में पहले ही प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं। वर्तमान में कोई नई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने साफ किया कि किसी को भी संरक्षण नहीं दिया जा रहा है और शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे मामले ने प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस पर सख्त कदम उठाता है या फिर अवैध प्लाटिंग का यह सिलसिला यूं ही जारी रहता है।