July 31, 2026

आयुष्मान योजना में करोड़ों के फर्जीवाड़े की आशंका, ओडिशा से मरीज लाकर निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर खेल!

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों में कथित फर्जी इलाज और करोड़ों रुपये के पैकेज क्लेम का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि ओडिशा से मरीजों को एजेंटों के माध्यम से लाकर सामान्य बीमारियों के नाम पर महंगे सर्जिकल पैकेज का दावा किया जा रहा है।

शिकायत मिलने के बाद सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी के निर्देश पर गठित पांच सदस्यीय जांच दल ने 22 और 23 जून को एसआर हॉस्पिटल (चिखली), एएम हॉस्पिटल (चरोदा), सूरज नर्सिंग होम, भिलाई नर्सिंग होम और नवजीवन हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान ओपीडी, आईपीडी और आयुष्मान योजना के अंतर्गत भर्ती मरीजों की फाइलों की पड़ताल की गई।

जांच में कई मरीज ओडिशा की गोपबंधु जन आरोग्य योजना के लाभार्थी पाए गए। अधिकारियों ने यह भी जांच की कि सामान्य बीमारियों में महंगे सर्जिकल पैकेज क्यों स्वीकृत किए गए और बड़ी संख्या में मरीजों की सर्जरी की आवश्यकता कैसे बताई गई।

ओडिशा से मरीज लाने का खुलासा

जांच के दौरान चिखली स्थित 180 बिस्तरों वाले एसआर हॉस्पिटल में 60 से 70 ओडिशा निवासी मरीज भर्ती मिले। अस्पताल में ओड़िया भाषा जानने वाली स्टाफ नर्स की तैनाती भी सामने आई। एएम हॉस्पिटल, लक्ष्मीनारायण हॉस्पिटल और नवजीवन हॉस्पिटल में भी ओडिशा के मरीज भर्ती पाए गए।

रिपोर्ट के अनुसार, बरगढ़, कोरापुट, नुआपाड़ा, संबलपुर और बलांगीर सहित ओडिशा के विभिन्न जिलों से एजेंट मरीजों को अस्पतालों तक लाते हैं। आरोप है कि प्रत्येक मरीज पर एजेंटों को 3 से 4 हजार रुपये तक का कमीशन दिया जाता है।

मरीजों को लालच देकर भर्ती कराने का आरोप

जांच में यह भी दावा किया गया कि कुछ लोगों को प्रतिदिन 300 से 500 रुपये का प्रलोभन देकर अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है। इसके बाद उनके दस्तावेज, आयुष्मान कार्ड और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर ओपीडी, आईपीडी, जांच और सर्जरी से जुड़े दस्तावेज तैयार कर एक से दो सप्ताह तक अस्पताल में रखा जाता है।

कथित एजेंटों ने भी कैमरे पर दावा किया कि उन्हें प्रत्येक मरीज लाने पर 3 से 3.5 हजार रुपये तक कमीशन मिलता है।

रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई

सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी ने कहा कि शिकायत मिलने पर जांच कराई गई है। यदि जांच प्रतिवेदन में अनियमितताएं सामने आती हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज को इलाज कराने की स्वतंत्रता है, लेकिन लालच देकर या बाध्य कर अस्पताल लाना उचित नहीं है।

वहीं, दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि यदि जांच में सामान्य बीमारी के मामलों में अधिक भुगतान वाले आयुष्मान पैकेज लेने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है।