ढाका। बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्वों की गतिविधियां एक बार फिर तेज होती नजर आ रही हैं। हिंदू समुदाय के बाद अब सूफी परंपरा और दरगाहें भी उनके निशाने पर हैं। ढाका स्थित इस्लामिक सूफी संगठन ‘मकान: सेंटर फॉर सूफी हेरिटेज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष 1 जनवरी से 30 जून के बीच देशभर में कम से कम 6 सूफी मजारों पर हमले किए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में कुश्तिया स्थित पीर अब्दुर रहमान की मजार पर करीब 300 लोगों की भीड़ ने हमला कर आगजनी की। इससे पहले मार्च में सिलहट में हजरत इब्राहिम शाह की मजार पर उर्स में शामिल श्रद्धालुओं पर लगभग 100 लोगों ने हमला किया। हमलावरों ने उर्स में बज रहे संगीत का विरोध करते हुए हिंसा की।
ढाका समेत कई शहरों की दरगाहें बनीं निशाना
कट्टरपंथियों ने ढाका के शाह अली बगदादी मजार, कुश्तिया की हजरत शाह दरगाह शरीफ, बरिशाल की हबीब शाह दरबार शरीफ और छतग्राम की हजरत लाल मिया शाह मजार को भी निशाना बनाया। इन घटनाओं ने सूफी समुदाय में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।
पीर का शव कब्र से निकालकर जलाने का भी आरोप
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सूफी स्थलों पर हमलों का सिलसिला नया नहीं है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान 97 मजारों पर हमले हुए, जिनमें 3 लोगों की मौत और 468 लोग घायल हुए थे। राजबारी स्थित नूरल पगला मजार में हमलावरों ने कथित तौर पर पीर का शव कब्र से निकालकर जला दिया था, लेकिन आरोपियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
बाउल कलाकारों में भी बढ़ा डर
सूफी बाउल संगीत से जुड़े कलाकार भी बढ़ते हमलों से चिंतित हैं। कलाकार नुपुर नादिया ने बताया कि पहले उन्हें हर महीने 15 से 20 कार्यक्रम मिलते थे, लेकिन अब कार्यक्रम लगभग बंद हो चुके हैं। बाउल संगीत को कट्टरपंथी समूह गैर-इस्लामिक बताकर विरोध कर रहे हैं। वहीं, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के सत्ता में आने के बाद भी कट्टरपंथी हिंसा में कमी नहीं आने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।





