March 5, 2026

बारनवापारा अभयारण्य में प्रशिक्षु IFS अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और वन्यजीव संरक्षण पर फोकस

रायपुर। प्रशिक्षु भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों के लिए बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों, आईटी आधारित वन प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य भावी वन सेवा अधिकारियों को क्षेत्रीय स्तर पर उपयोग में आने वाली तकनीकों और प्रबंधन प्रक्रियाओं से व्यावहारिक रूप से परिचित कराना रहा।


आधुनिक तकनीक अपनाने की अपील

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी अधिकारी आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग कर अपने कौशल का विकास करें और छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा के संरक्षण के लिए सतत प्रयास करें। उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को शुभकामनाएं भी दीं।


DGPS तकनीक पर मिला प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं क्षेत्रीय निदेशक स्तोविषा समझदार ने DGPS की कार्यप्रणाली, उपयोगिता और वन सर्वेक्षण, सीमांकन व प्रबंधन में इसके महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि DGPS आधारित सर्वेक्षण से सटीक डेटा संग्रह संभव होता है, जो दीर्घकालिक संरक्षण योजनाओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है।


‘गज संकेत’ ऐप से हाथी निगरानी

उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप-निदेशक वरुण जैन ने प्रशिक्षु अधिकारियों को “गज संकेत” मोबाइल एप्लिकेशन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह एप हाथी मॉनिटरिंग, मूवमेंट ट्रैकिंग, मानव–हाथी संघर्ष प्रबंधन और त्वरित सूचना साझा करने में एक प्रभावी डिजिटल टूल है। अधिकारियों को एप के फील्ड उपयोग, डेटा एंट्री और प्रबंधन से संबंधित व्यावहारिक जानकारी भी दी गई।


फील्ड आधारित प्रशिक्षण को बताया जरूरी

प्रशिक्षण के समापन अवसर पर बलौदाबाजार वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा कि इस प्रकार के तकनीकी एवं फील्ड आधारित प्रशिक्षण भावी वन सेवा अधिकारियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल टूल्स और वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों के माध्यम से वन एवं वन्यजीव संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।


अभयारण्य का कराया गया भ्रमण

बारनवापारा अभयारण्य के अधीक्षक कृषानू चन्द्राकार ने प्रशिक्षु अधिकारियों को अभयारण्य की भौगोलिक, पारिस्थितिक और संरक्षण संबंधी विशेषताओं से अवगत कराया। इसके साथ ही अधिकारियों को वनभैंसा संरक्षण केंद्र, ब्लैकबक रिलोकेशन एवं संरक्षण केंद्र, ग्रासलैंड विकास क्षेत्र सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया गया, जिससे उन्हें संरक्षण कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।