बस्तर। तोकापाल ब्लॉक के मारेंगा में एनएमडीसी की साइडिंग पर लौह अयस्क की ढुलाई चार दिनों से ठप है। ग्रामीणों के विरोध से कंपनी को रोजाना करोड़ों के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि साइडिंग की अनुमति के बदले किए गए वादे पूरे नहीं हुए। 2020 की जनसुनवाई में रोजगार और ग्राम विकास का भरोसा दिया गया था, लेकिन न युवाओं को नौकरी मिली, न ही सीएसआर से गांव को कोई ठोस लाभ। उल्टा, साइडिंग से धूल, शोर और प्रदूषण बढ़ गया है। लौह अयस्क की धूल से सांस और त्वचा रोग बढ़ने की शिकायतें सामने आई हैं। गुरुवार को एसडीएम, तहसीलदार और एसडीओपी के साथ एनएमडीसी अधिकारी पहुंचे, लेकिन दो घंटे की चर्चा के बाद भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। ग्रामीणों ने साफ कहा कि उनकी मांगें पूरी होंगी तभी ढुलाई चलेगी। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे बलराम मौर्य ने इसे गांव, रोजगार और पर्यावरण की लड़ाई बताया।
तेलीनसत्ती गांव अपनी अनोखी परंपराओं के लिए पहचाना जाता है। यहां न होलिका दहन होता है और न दशहरे पर रावण दहन। गांव में किसी की मृत्यु पर भी चिता नहीं जलाई जाती; शव को पड़ोसी गांव देमार की सीमा तक ले जाया जाता है। गांव के केंद्र में स्थित 12वीं शताब्दी का तेलीनसत्ती मंदिर सत्ती माता के रूप में पूजनीय है। स्थानीय बुजुर्ग नई पीढ़ी को परंपरा से जोड़ने का काम कर रहे हैं। 2400 की आबादी वाले इस गांव में 85% साक्षरता है और आस्था ही नियम है।
नगर पंचायत फरसगांव ने बकाया कर वसूली पर सख्ती बढ़ा दी है। फरवरी के अंत तक टैक्स जमा न करने वालों पर कार्रवाई तय है और बड़े बकायादारों की सूची सार्वजनिक की जाएगी। इसमें संपत्ति कर, जल कर और दुकान किराया शामिल हैं। मार्च से प्रकरण एसडीएम न्यायालय भेजे जाएंगे और धारा 165 के तहत चल-अचल संपत्ति की नीलामी भी संभव है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होंगे।
दंतेवाड़ा जिले के गीदम क्रशर प्लांट में ब्लास्ट के बाद बड़ा हादसा हुआ, जिसमें उड़ता हुआ बोल्डर स्कूल की छत पर गिरा। ब्लास्टर और असिस्टेंट ब्लास्टर गिरफ्तार हुए, जबकि दो आरोपी फरार हैं। जिले के पांच क्रशर प्लांट नियमों को चुनौती दे रहे हैं। सुरक्षा इंतजाम न होने और धूल नियंत्रण उपकरण न होने से इलाके में खतरा बढ़ा है।
बस्तर का धुड़मारास गांव अंतरराष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ रहा है। यूएन मेंटर किर्सी ह्यवैरिनेन के भ्रमण से नई संभावनाएं खुलीं। कांगेर नाले में कयाकिंग और राफ्टिंग का तकनीकी परीक्षण हुआ, और सुरक्षा, गाइड प्रशिक्षण और आपदा प्रबंधन पर जोर दिया गया। ग्रामीणों ने रोजगार और महिलाओं के स्वयं सहायता समूह से जुड़ने की संभावनाओं पर सवाल उठाए। धुड़मारास को एडवेंचर हब बनाने की योजना अब जमीन पर उतरने की चुनौती बन गई है।
सुकमा जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हड़ताल पर हैं। 1981 केंद्रों में ताले लगे हुए हैं, और 3600 से अधिक कार्यकर्ता और सहायिकाएं प्रदर्शन में शामिल हैं। उनकी मांगें हैं—शासकीय दर्जा, मानदेय वृद्धि और सुविधाएं। वर्तमान मानदेय कार्यकर्ताओं के लिए 4500 और सहायिकाओं के लिए 2250 रुपए है, जो मनरेगा मजदूरी से भी कम है। पेंशन, ग्रेच्युटी और चिकित्सा अवकाश की सुविधा नहीं है। उन्होंने 9 मार्च को विधानसभा घेराव की चेतावनी दी है।
जगदलपुर में होली पर्व को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड में है। 2 और 4 फरवरी को होली और रंग खेला जाएगा। माड़पाल, नानगुर और मावली माता क्षेत्र में विशेष निगरानी रखी जाएगी। चौक-चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा, और नशे में वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। डीजे पर अश्लील गानों पर प्रतिबंध रहेगा। पुलिस का संदेश है—होली खुशी की रहे, अराजकता की नहीं।
लोहे की खनन के बाद निकलने वाला लाल पानी नालों में बह रहा है, जिससे गांवों में सफाई, स्वास्थ्य और सुविधाओं पर भारी असर पड़ा है। महिलाएं दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। पेट, त्वचा और सांस से जुड़ी बीमारियों में वृद्धि हुई है। डीएमएफ फंड के उपयोग पर भी सवाल उठ रहे हैं। सड़क, स्कूल और शौचालय जैसी सुविधाएं अधूरी हैं। खनन से मुनाफा हो रहा है, लेकिन गांवों को इसके भारी दुष्प्रभाव भुगतने पड़ रहे हैं।





