July 29, 2026

जगदलपुर: बस्तर में फल-सब्जियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल, केमिकल जांच के लिए स्थानीय लैब नहीं

जगदलपुर। बस्तर में लोगों तक पहुंच रहे फल और सब्जियों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा सड़े-गले फलों पर कार्रवाई किए जाने के बावजूद अब केमिकल जांच व्यवस्था की कमी चर्चा का विषय बन गई है।

बस्तर में नहीं है फूड टेस्टिंग लैब

विभागीय अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि बस्तर संभाग में फलों और सब्जियों की स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक जांच के लिए कोई आधुनिक फूड टेस्टिंग लैब उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यह तुरंत पता लगाना संभव नहीं हो पा रहा कि बाजार में बिक रहे फलों में कैल्शियम कार्बाइड, ऑक्सीटोसिन, एथिलीन या अन्य प्रतिबंधित रसायनों का इस्तेमाल किया गया है या नहीं।

देखकर लगाया जाता है अंदाजा

अधिकारियों के मुताबिक निरीक्षण के दौरान फलों की स्थिति देखकर यह अनुमान लगाया जाता है कि उन्हें किस तरह के रसायनों से पकाया गया होगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल देखने के आधार पर किसी फल में खतरनाक केमिकल की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की जा सकती।

संदिग्ध सैंपल रायपुर भेजे जाते हैं

विभाग संदिग्ध फल और सब्जियों के नमूने लेकर उन्हें रायपुर स्थित फूड टेस्टिंग लैब भेजता है, जहां वैज्ञानिक जांच के बाद रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई होती है।

बाहरी लैब पर निर्भर जांच प्रक्रिया

फिलहाल बस्तर में खाद्य पदार्थों की जांच पूरी तरह बाहरी लैब पर निर्भर है। ऐसे मामलों की वैज्ञानिक जांच NABL मान्यता प्राप्त या FSSAI अप्रूव्ड लैब में की जाती है, जहां केमिकल एनालिसिस के जरिए प्रतिबंधित पदार्थों की पुष्टि होती है।

62 किलो सड़े फल नष्ट, लेकिन केमिकल रिपोर्ट नहीं

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने हाल ही में 62 किलो सड़े-गले फल नष्ट करने की कार्रवाई की है, लेकिन अब तक केमिकल से पकाए गए फलों को लेकर कोई स्थानीय लैब रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

स्वास्थ्य सुरक्षा पर उठे सवाल

स्थानीय स्तर पर टेस्टिंग सुविधा नहीं होने के कारण खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों की सेहत से जुड़े मामलों में केवल अनुमान नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जांच और प्रमाण आधारित कार्रवाई जरूरी है।