छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत लगातार सवालों के घेरे में है। तीन महीने का राशन एक साथ देने की घोषणा जहां पूरी तरह विफल नजर आ रही है, वहीं जंगलों की कटाई, अधूरी योजनाएं और बढ़ती आपराधिक घटनाएं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
राशन वितरण व्यवस्था चरमराई
करीब 1.75 लाख परिवारों को राहत देने की योजना उल्टा परेशानी का कारण बन गई है। 485 राशन दुकानों में से केवल लगभग 300 में ही आंशिक स्टॉक उपलब्ध है। लोगों को एक महीने का राशन पाने के लिए भी बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
ईंट भट्ठों में जल रहे जंगल
इंद्रावती नदी किनारे 200 से अधिक ईंट भट्ठों के संचालन से जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। आम, महुआ, तेंदू और बबूल जैसे पेड़ों को काटकर भट्ठों में झोंका जा रहा है, जबकि नियमों का खुला उल्लंघन जारी है।
अपराध पर पुलिस की कार्रवाई
जगदलपुर में चाकू दिखाकर लोगों को धमकाने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। वहीं नगरनार में मोटरसाइकिल चोरी के दो आरोपियों को भी पुलिस ने पकड़ा है।
टैक्स वसूली में असंतुलन
नगर निगम ने संपत्ति कर में 95% वसूली कर ली है, लेकिन जल कर में केवल 30% ही वसूली हो पाई है। 30 अप्रैल तक टैक्स जमा करने पर छूट दी गई है।
मौसम का कहर, किसानों को नुकसान
आंधी-तूफान और बिजली गिरने से पांच मवेशियों की मौत हो गई और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। प्रभावित ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग की है।
मधुमक्खियों के हमले से भगदड़
कोंडागांव के बाजार में मधुमक्खियों के हमले से अफरा-तफरी मच गई, जिसमें 14 वर्षीय किशोर गंभीर रूप से घायल हो गया।
वन कर्मचारियों की समस्याएं बरकरार
रेंजर्स एसोसिएशन की बैठक में संसाधनों और सुरक्षा की कमी जैसे मुद्दे उठाए गए, लेकिन समाधान अब तक स्पष्ट नहीं है।
जल संकट का बढ़ता खतरा
अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई से जंगल तेजी से खत्म हो रहे हैं, जिससे भविष्य में जल संकट गहराने की आशंका है।
जल जीवन मिशन अधूरा
कई गांवों में नल तो लगाए गए हैं, लेकिन पानी नहीं पहुंच रहा। टंकियां बिना जल स्रोत के खड़ी हैं, जिससे योजना की विफलता उजागर हो रही है।
बस्तर में विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत निराशाजनक है। प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर निगरानी के कारण आम जनता को लगातार समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।





