May 18, 2026

बस्तर में शांति की नई दौड़: आत्मसमर्पित नक्सलियों के साथ 42 किमी हेरिटेज मैराथन 22 मार्च को

जगदलपुर | विशेष रिपोर्ट

लंबे समय तक नक्सलवाद की छाया में रहे बस्तर क्षेत्र में अब बदलाव की एक नई कहानी लिखी जा रही है। इसी बदलाव को दुनिया के सामने लाने के उद्देश्य से 22 मार्च को एक विशेष हेरिटेज मैराथन का आयोजन किया जा रहा है, जो न सिर्फ खेल का आयोजन है बल्कि शांति, पुनर्वास और विकास का मजबूत संदेश भी देगा।

इस मैराथन की सबसे खास बात यह है कि इसमें 200 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सली भी हिस्सा लेंगे। ये सभी पूर्व माओवादी अब मुख्यधारा में लौट चुके हैं और समाज के साथ मिलकर एक नई शुरुआत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए विशेष कैटेगरी

बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मैराथन में आत्मसमर्पित माओवादियों के लिए एक अलग विशेष श्रेणी बनाई गई है। बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और बस्तर के विभिन्न इलाकों से पूर्व नक्सलियों ने बड़ी संख्या में इस दौड़ के लिए पंजीकरण कराया है।

यह पहल न केवल उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने का प्रयास है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देती है कि हिंसा छोड़कर विकास और शांति की राह अपनाई जा सकती है।

42 किलोमीटर की दौड़: लालबाग से चित्रकोट तक

यह मैराथन जगदलपुर के लालबाग मैदान से शुरू होकर विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात तक पहुंचेगी। लगभग 42 किलोमीटर लंबी यह दौड़ केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि एक प्रतीकात्मक यात्रा है — जो बस्तर के संघर्ष से विकास की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाती है।

इस दौरान प्रतिभागी बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और बदलती सामाजिक परिस्थितियों को भी करीब से देख सकेंगे।

हर वर्ग की भागीदारी, एकता का संदेश

इस आयोजन में केवल पूर्व नक्सली ही नहीं, बल्कि पेशेवर एथलीट, स्थानीय युवा, छात्र-छात्राएं और आम नागरिक भी बड़ी संख्या में भाग लेंगे। यह सामूहिक भागीदारी बस्तर में सामाजिक समरसता और एकता की नई तस्वीर पेश करेगी।

आयोजकों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम लोगों के बीच विश्वास बढ़ाते हैं और विकास की प्रक्रिया को गति देते हैं।

बदलते बस्तर की मजबूत पहचान

यह हेरिटेज मैराथन बस्तर की बदलती पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जहां कभी बंदूक और भय का माहौल था, वहीं अब खेल, संस्कृति और विकास की बातें हो रही हैं।

यह आयोजन उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है, जो अब तक हिंसा के रास्ते पर थे, कि वे भी मुख्यधारा में लौटकर समाज के साथ आगे बढ़ सकते हैं।


बस्तर की यह मैराथन सिर्फ 42 किलोमीटर की दूरी नहीं, बल्कि एक लंबी यात्रा का प्रतीक है — संघर्ष से शांति तक, भय से विश्वास तक और हिंसा से विकास तक।