जगदलपुर। बस्तर में विकास के साथ-साथ अब सांस्कृतिक विरासत को सहेजने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ज्ञानभारतम अभियान के तहत जिले में प्राचीन पांडुलिपियों और ताड़पत्रों के संरक्षण का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
अब तक जिले में 450 से अधिक ताड़पत्रों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 100 से अधिक की स्कैनिंग आधुनिक तकनीक और मोबाइल ऐप के माध्यम से की गई है। कई पांडुलिपियां ओड़िया भाषा में मिली हैं, जो बस्तर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाती हैं।

जिला प्रशासन द्वारा इस कार्य के लिए समिति का गठन किया गया है और अधिकारी स्वयं इन दस्तावेजों को सुरक्षित रखने वाले परिवारों से संपर्क कर जानकारी जुटा रहे हैं।
प्रशासन के अनुसार ये पांडुलिपियां बस्तर की ऐतिहासिक धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।





