जगदलपुर। छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग आज कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों का केंद्र बना हुआ है, जहां एक ओर सुप्रीम कोर्ट ने ग्राम सभाओं के ‘चेतावनी बोर्ड’ को संवैधानिक मान्यता देकर आदिवासी अस्मिता और पेसा (PESA) कानून की ताकत को पुख्ता किया है, तो दूसरी ओर कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में भी कड़े कदम उठाए गए हैं।
धर्मान्तरण रोकने के लिए ग्राम सभा के ‘चेतावनी बोर्ड’ को मिली संवैधानिक मान्यता
छत्तीसगढ़ के कांकेर क्षेत्र से जुड़े एक ऐतिहासिक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने ग्राम सभाओं द्वारा धर्मान्तरण गतिविधियों के खिलाफ लगाए गए ‘चेतावनी बोर्ड’ को हटाने वाली याचिका को खारिज करते हुए हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन प्रलोभन, बल या कपट के जरिए धर्मान्तरण का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। पेसा (PESA) कानून के तहत ग्राम सभाओं की स्वायत्तता को मजबूती देते हुए अदालत ने माना कि जनजातीय समुदायों को अपनी सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और ‘बस्तर की आत्मा’ कहे जाने वाले सामाजिक ढांचे (जैसे गोटुल और देव-परंपरा) की रक्षा करने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है। स्थानीय प्रतिनिधियों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ आदिवासियों की एक बड़ी जीत बताया है, जो शिक्षा और सेवा के नाम पर सामाजिक विभाजन पैदा करने वाली गतिविधियों पर कानूनी रोक लगाता है।
25 साल से फरार तीन स्थायी वारंटी गिरफ्तार
कांकेर। छत्तीसगढ़ की पखांजुर पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए पिछले 25 वर्षों से फरार चल रहे तीन स्थायी वारंटियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। ये आरोपी महाराष्ट्र के गढ़चिरौली क्षेत्र के रहने वाले हैं और हत्या, लूट तथा आगजनी जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होने के बावजूद लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहे थे। 15 फरवरी को मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर 37 वर्षीय महदू राम, 47 वर्षीय शंकर लाल और 46 वर्षीय सुकदेव को उनके पैतृक निवास से हिरासत में लिया। इन आरोपियों के खिलाफ पखांजुर थाने में आईपीसी की धारा 307, 436 और 34 के तहत कई पुराने मामले दर्ज हैं। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से न केवल वर्षों पुराने मामलों में न्याय की उम्मीद जागी है, बल्कि अपराधियों को भी यह कड़ा संदेश गया है कि कानून के लंबे हाथों से बच पाना नामुमकिन है।
लापता CISF सब-इंस्पेक्टर का 36 घंटे बाद शव बरामद
जगदलपुर। नगरनार स्टील प्लांट में पदस्थ CISF के सब-इंस्पेक्टर आकाश चौधरी का शव लापता होने के 36 घंटे बाद ओडिशा के गुलमी वॉटरफॉल से बरामद कर लिया गया है। रविवार को अपने साथियों के साथ पिकनिक मनाने गए आकाश नहाने के दौरान पानी के तेज बहाव में बह गए थे, जिसके बाद SDRF, NDRF और ओडिशा आपदा बल की टीमों ने सघन सर्च ऑपरेशन चलाया था। मंगलवार सुबह शव मिलने के बाद उसे नगरनार स्टील प्लांट लाया गया, जहाँ अधिकारियों और जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी। शहीद जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव चरखी दादरी, हरियाणा के लिए रवाना कर दिया गया है।
20 पंचायतों से वसूली और लापरवाह कर्मियों पर अर्थदंड
बीजापुर। जनपद पंचायत बीजापुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान वित्तीय अनियमितताओं को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। एसडीएम जागेश्वर कौशल की अध्यक्षता में हुई इस जन सुनवाई में वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों में गड़बड़ी पाए जाने पर 20 ग्राम पंचायतों से राशि वसूली के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, सोशल ऑडिट कार्य में लापरवाही बरतने और सहयोग न करने पर एक तकनीकी सहायक और पांच रोजगार सहायकों पर 200 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक का अर्थदंड लगाया गया है। बैठक में यह भी सामने आया कि उद्यान विभाग और कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा सोशल ऑडिट के दौरान उठाई गई आपत्तियों के निराकरण में लापरवाही की जा रही है। एसडीएम ने सख्त चेतावनी देते हुए इन विभागों को एक सप्ताह के भीतर समस्त ऑडिट अभिलेख जमा करने का अल्टीमेटम दिया है, अन्यथा पूरी राशि की वसूली की कार्रवाई की जाएगी।
सहकारी बैंक में नकदी संकट, किसानों की बढ़ी परेशानी
छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक की दुर्गूकोंदल शाखा में नकदी की भारी कमी के चलते किसान और खाताधारक अपने ही जमा पैसे निकालने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। बैंक के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन पर्याप्त कैश न होने के कारण बैंक प्रबंधन द्वारा भुगतान को सीमित कर दिया गया है। किसानों का कहना है कि धान बिक्री और सरकारी योजनाओं की राशि खातों में होने के बावजूद उन्हें घंटों इंतजार के बाद निराश लौटना पड़ रहा है। इस नकदी संकट का सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है, क्योंकि किसानों को बीज, खाद और डीजल खरीदने के लिए तत्काल नगद की आवश्यकता है। खाताधारकों ने प्रशासन से मांग की है कि बैंक में पर्याप्त नकदी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें और उनके कृषि कार्य समय पर पूरे हो सकें।





