March 3, 2026

बस्तर में हवाई सेवाओं का विस्तार अधर में, रनवे और विजिबिलिटी बना बड़ी चुनौती

जगदलपुर। बस्तर में हवाई सेवाओं के विस्तार की मांग वर्षों से उठ रही है, लेकिन जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट आज भी अधूरे रनवे और अधूरी प्रक्रियाओं का प्रतीक बना हुआ है। आदिवासी संस्कृति और पर्यटन की अपार संभावनाओं वाले बस्तर के लिए हवाई सेवाएं विकास की रीढ़ मानी जाती हैं, लेकिन क्षेत्र में यह रीढ़ अभी भी कमजोर है।

मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जहाज भाटा के रूप में विकसित किया गया था, आज भी उसी दौर की बुनियादी संरचना से जूझ रहा है। आज़ादी के बाद से रनवे की रिकार्पेटिंग का काम पूरी तरह नहीं हो पाया है। रनवे जर्जर होने की वजह से बड़े कमर्शियल विमानों की लैंडिंग संभव नहीं है, और एयरपोर्ट केवल ATR जैसे छोटे रीजनल विमानों तक ही सीमित रह गया है।

रनवे रिकार्पेटिंग के लिए कुल 25 करोड़ रुपए की आवश्यकता बताई गई है। राज्य सरकार ने पहले 11 करोड़ रुपए जारी किए थे, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका। अब अतिरिक्त 14 करोड़ रुपए भी जारी कर दिए गए हैं, जिससे कुल राशि पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद PWD विभाग की टेंडर प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।

पर्यटन गतिविधियों में बढ़ोतरी के बावजूद एयरपोर्ट की खराब विजिबिलिटी और रनवे की स्थिति सेवाओं को प्रभावित कर रही है। स्थानीय निवासी शैलेंद्र का कहना है कि यदि रनवे और विजिबिलिटी की समस्या दूर हो जाए, तो बस्तर में पर्यटन और व्यापार दोनों को बड़ा फायदा होगा।

जिला प्रशासन का कहना है कि अब देरी नहीं होगी। राशि आवंटित हो चुकी है और PWD विभाग जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी करके रनवे रिकार्पेटिंग का काम शुरू करेगा। शासन और प्रशासन दोनों स्तर पर एयरपोर्ट के विकास के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।