जगदलपुर। बारिश का मौसम शुरू होते ही बस्तर जिले में मलेरिया का खतरा एक बार फिर बढ़ने लगा है। स्वास्थ्य विभाग भले ही जागरूकता अभियान और सर्वे चलाने का दावा कर रहा हो, लेकिन जनवरी से मई 2026 तक के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि संक्रमण अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आया है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि जिले में सामने आए अधिकांश मरीज घातक पीएफ (प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम) मलेरिया से संक्रमित पाए गए हैं।
6 महीने में 617 मरीज, 82 फीसदी पीएफ मलेरिया
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बस्तर जिले की करीब 9 लाख 52 हजार 223 आबादी में जनवरी से मई 2026 के बीच 617 मलेरिया पॉजिटिव मरीज मिले हैं। इनमें 111 मरीज पीवी (Plasmodium Vivax) और 506 मरीज पीएफ (Plasmodium Falciparum) मलेरिया से संक्रमित पाए गए हैं। यानी कुल मरीजों में 82 प्रतिशत से अधिक पीएफ मलेरिया के हैं, जिसे मलेरिया का सबसे गंभीर और जानलेवा प्रकार माना जाता है।
लोहण्डीगुड़ा, बड़ेकिलेपाल और दरभा सबसे संवेदनशील
संक्रमण का सबसे अधिक असर लोहण्डीगुड़ा में देखने को मिला, जहां 156 मरीज मिले हैं। इसके बाद बड़ेकिलेपाल में 155 और दरभा में 105 मरीज दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग इन तीनों क्षेत्रों को जिले के सबसे संवेदनशील ब्लॉकों में शामिल कर विशेष निगरानी रख रहा है।
पिछले साल के मुकाबले तेजी से बढ़ रहे मामले
विभाग के मुताबिक, वर्ष 2025 में पूरे साल के दौरान जिले में 2,888 मलेरिया मरीज मिले थे, जबकि वर्ष 2026 में केवल शुरुआती छह महीनों में ही करीब 651 मरीज सामने आ चुके हैं। मानसून का अधिकांश समय अभी बाकी है, ऐसे में यदि रोकथाम के उपाय प्रभावी नहीं रहे तो आने वाले महीनों में मरीजों की संख्या और बढ़ सकती है।
40 फीसदी मरीजों में नहीं दिखते लक्षण
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में लगभग 40 प्रतिशत संक्रमित ऐसे हैं जिनमें मलेरिया के कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे मरीज अनजाने में संक्रमण फैलाने का कारण बन सकते हैं। इसी वजह से किसी क्षेत्र में एक मरीज मिलने पर विभाग केवल उसका इलाज नहीं करता, बल्कि उसके आसपास के 50 घरों या लगभग 250 लोगों की भी जांच कर छिपे हुए संक्रमितों की पहचान करता है।
एमएमसी सर्वे में 299 नए मरीज मिले
वर्तमान में 15 जून से 15 जुलाई तक विशेष एमएमसी (Mass Malaria Campaign) सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान अब तक 299 नए मलेरिया मरीज सामने आए हैं। विभाग का लक्ष्य इस अभियान के तहत 2 लाख 64 हजार 490 लोगों की जांच करना है।
अब तक नहीं हुई कोई मौत, विभाग ने जारी की सलाह
राहत की बात यह है कि इस वर्ष अब तक जिले में मलेरिया से एक भी मौत दर्ज नहीं हुई है। हालांकि लगातार सामने आ रहे नए मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने, घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देने तथा बुखार आने पर तत्काल मलेरिया जांच कराने की अपील की है।





