May 13, 2026

बस्तर में माओवादियों के आर्थिक नेटवर्क का खुलासा, 3 महीने में 6.75 करोड़ कैश और 8 किलो सोना बरामद

जगदलपुर। बस्तर में माओवादी नेटवर्क के कमजोर पड़ने के साथ अब उनके आर्थिक ढांचे की परतें भी खुलने लगी हैं। सुरक्षा बलों की लगातार सर्चिंग में ऐसे डंप सामने आ रहे हैं, जो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि संगठन सिर्फ हथियारों के दम पर नहीं, बल्कि मजबूत आर्थिक नेटवर्क के सहारे भी संचालित हो रहा था। बीते तीन महीनों में जवानों ने अलग-अलग इलाकों से करीब 6 करोड़ 75 लाख रुपए नकद और 8 किलो सोना बरामद किया है।

आईजी सुंदरराज पी ने दी जानकारी
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि यह बरामदगी अंदरूनी जंगल क्षेत्रों में छिपाकर रखे गए डंप से हुई है। सुरक्षा बल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं और आशंका है कि अभी भी कई स्थानों पर बड़ी मात्रा में नकदी और अन्य सामान छिपाकर रखा गया है।

नोटबंदी के बाद बदली रणनीति
जानकारों के मुताबिक, नोटबंदी के बाद माओवादियों ने नकदी रखने की बजाय सोने में निवेश करना शुरू कर दिया था, ताकि जोखिम कम हो सके। बरामद 8 किलो सोने की कीमत करीब 13 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। इससे संगठन की आर्थिक ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

लेवी से खड़ा हुआ करोड़ों का नेटवर्क
बताया जा रहा है कि माओवादी तेंदूपत्ता संग्राहकों, ठेकेदारों और विकास कार्यों से जुड़े लोगों से लेवी वसूलते थे। यही रकम धीरे-धीरे करोड़ों में पहुंचती गई और संगठन की आर्थिक रीढ़ बन गई।

50 करोड़ से ज्यादा छिपी पूंजी होने का अनुमान
वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र तिवारी का कहना है कि अब तक बरामद रकम सिर्फ एक हिस्सा है। उनका मानना है कि बस्तर में माओवादियों की छिपी पूंजी 50 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है।

आर्थिक रीढ़ तोड़ने पर फोकस
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि मौजूदा अभियान सिर्फ हथियार बरामद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि माओवादियों की आर्थिक व्यवस्था को खत्म करने पर भी फोकस किया जा रहा है। लगातार जारी ऑपरेशन के जरिए संगठन के फंडिंग नेटवर्क को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।