रायपुर। कभी नक्सलवाद की भयावह छाया में घिरा रहने वाला छत्तीसगढ़ का बस्तर अब विकास, विश्वास और अवसरों की नई पहचान बना रहा है। डबल इंजन सरकार और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर में सुरक्षा के साथ विकास की योजनाएं तेजी से जमीन पर उतर रही हैं। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बस्तर दौरा इस बदलाव की बड़ी तस्वीर लेकर सामने आया।
गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर दौरे के दौरान कहा कि अब बस्तर “खूनी गनतंत्र” से निकलकर “जनतंत्र और विकास” की राह पर आगे बढ़ चुका है। उन्होंने दावा किया कि 31 मार्च 2026 की समय सीमा से पहले ही देश नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है।

सुरक्षा कैंप बने जनसेवा केंद्र
नक्सल विरोधी अभियानों के लिए बनाए गए सुरक्षा कैंप अब ग्रामीणों के लिए जनसेवा केंद्र में बदल रहे हैं। नेतानार स्थित “शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा” इसका बड़ा उदाहरण है। यहां ग्रामीणों को 370 से अधिक सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
ग्रामीणों को आधार कार्ड, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आय-जाति प्रमाण पत्र, आयुष्मान भारत योजना और अन्य सुविधाएं गांव में ही मिल रही हैं। साथ ही आंगनबाड़ी और प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था भी इसी केंद्र से संचालित की जा रही है।
डिजिटल सेवाओं से बढ़ा भरोसा
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में डिजिटल गवर्नेंस सेवाओं के विस्तार ने ग्रामीणों का भरोसा मजबूत किया है। जगदलपुर में शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा का लोकार्पण करते हुए अमित शाह ने सुरक्षा से सेवा की ओर बढ़ते बस्तर की तस्वीर पेश की। वहीं डायल-112 सेवा और फॉरेंसिक वाहनों की शुरुआत से कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है।
महिलाओं को मिल रहा आर्थिक संबल

सरकार की योजनाओं से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। स्व-सहायता समूहों को बढ़ावा देने के साथ महिलाओं को बैंक सखी के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे गांवों में ही बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।
नेतानार की लबी नाग ने बताया कि इमली प्रसंस्करण केंद्र से जुड़कर वे सालाना करीब एक लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। वहीं ग्रामीण महिलाओं को महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं का लाभ भी आसानी से मिल रहा है।

समर्पण करने वालों के पुनर्वास पर फोकस
सरकार अब नक्सल हिंसा छोड़ने वाले लोगों के पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दे रही है। केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए 20 करोड़ रुपये का फंड जारी किया गया है। समर्पण करने वालों को शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जोड़कर मुख्यधारा में लाने की कोशिश की जा रही है।
बस्तर को वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी
सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में बस्तर को पर्यटन, संस्कृति और रोजगार का बड़ा केंद्र बनाना है। हस्तशिल्प, स्थानीय कला, बस्तर ओलंपिक और पारंपरिक व्यंजनों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुरक्षा और विकास को साथ लेकर चलने की नीति के कारण बस्तर अब सुरक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त क्षेत्र के रूप में उभर रहा है।





