जगदलपुर/दंतेवाड़ा/कोंडागांव/सुकमा। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में विकास कार्यों से लेकर कानून व्यवस्था तक कई बड़े मुद्दे सामने आए हैं। निर्माण कार्यों में अनियमितता, अवैध खनन, शिक्षा संस्थानों में घटनाएं और जनआंदोलन ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
64 करोड़ के भवन निर्माण पर सवाल
जगदलपुर के धरमपुरा में बन रहे भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण के सात मंजिला भवन की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप लगे हैं। 64 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में 20 करोड़ से अधिक भुगतान हो चुका है, बावजूद इसके पिलर टेढ़े, बीम असंतुलित और दीवारों में खामियां सामने आई हैं। छत में दरारें और निर्माण में लापरवाही के आरोपों ने मामले को संदिग्ध बना दिया है।
अवैध खनन और ब्लास्टिंग का खतरा
दंतेवाड़ा के जावंगा क्षेत्र में अवैध खनन का बड़ा मामला सामने आया है। 11 हजार घनमीटर पत्थर के अवैध उत्खनन पर प्रशासन ने खदान बंद कर 55 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया है। ब्लास्टिंग का असर 300 मीटर दूर स्कूल तक पहुंचा, जहां पत्थर गिरने से बड़ा हादसा टल गया।
छात्राओं से दुर्व्यवहार, शिक्षक निलंबित
कोंडागांव में पिटेचुवा स्कूल के शिक्षक अमीर लाल नेताम को छात्राओं से दुर्व्यवहार के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तारी भी की गई है।
बस्तर में बढ़ने लगी गर्मी
जगदलपुर सहित पूरे बस्तर में तापमान बढ़ने लगा है। हाल ही में 35 डिग्री दर्ज तापमान आने वाले दिनों में 40 डिग्री तक पहुंच सकता है। मौसम विभाग ने गर्मी बढ़ने की चेतावनी दी है।
डीएमएफ फंड को लेकर घेराव
जगदलपुर में युवा और छात्र संगठनों ने डीएमएफ फंड के दुरुपयोग को लेकर कलेक्टोरेट का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झूमाझटकी भी हुई। प्रदर्शनकारियों ने 125 करोड़ रुपये के उपयोग पर सवाल उठाए।
नक्सल प्रभाव घटने से लौट रही जिंदगी
कोंडागांव क्षेत्र में नक्सल प्रभाव कम होने के बाद गांवों में लोग लौटने लगे हैं। तुमड़ीवाल गांव का एक परिवार 15 साल बाद वापस आया और नई शुरुआत की है।
छात्राओं का प्रदर्शन, प्रशासन पर दबाव
सुकमा के कोंटा में छात्राएं निलंबित अधीक्षिका के समर्थन में सड़कों पर उतर आईं। आश्रम व्यवस्था को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं।
जुए के नेटवर्क का खुलासा
सुकमा के कोंटा क्षेत्र में पुलिस ने आरएसएन लॉज में छापा मारकर 22 जुआरियों को गिरफ्तार किया। यह अंतर्राज्यीय जुआ नेटवर्क बताया जा रहा है, जिसमें तेलंगाना और आंध्रप्रदेश के लोग शामिल हैं।
कुल मिलाकर, बस्तर संभाग में विकास कार्यों की गुणवत्ता, अवैध गतिविधियां, सामाजिक सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दे एक साथ चर्चा में हैं, जिससे क्षेत्र की व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।





