जगदलपुर। बस्तर संभाग से स्वास्थ्य, खेल, सड़क और कौतूहल से जुड़ी कई अहम खबरें सामने आई हैं। बस्तर में फिलहाल स्वाइन फ्लू का कोई एक्टिव केस नहीं है, वहीं अबूझमाड़ के खिलाड़ियों ने ताइक्वांडो में शानदार प्रदर्शन करते हुए 8 पदक जीते हैं। दूसरी ओर दंतेवाड़ा और सुकमा में खराब सड़कों ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। जगदलपुर के गड़दा गांव में न्यूट्रल वाहन के खुद चढ़ाई की ओर बढ़ने का मामला भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
बस्तर में स्वाइन फ्लू का कोई एक्टिव केस नहीं
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में H1N1 के बढ़ते मामलों के बीच बस्तर में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। प्रदेश में 27 अगस्त तक स्वाइन फ्लू के 105 मामले सामने आए हैं, जिनमें 18 मरीज एक्टिव हैं। बस्तर में अब तक दो संक्रमित मरीज मिले हैं, लेकिन वर्तमान में कोई एक्टिव केस नहीं है। दंतेवाड़ा में भी एक मामला सामने आया था, वहां भी फिलहाल कोई सक्रिय मरीज नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग ने मौसम में बदलाव को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है। सर्दी, खांसी, तेज बुखार, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी H1N1 के संभावित लक्षण हो सकते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक सामान्य वायरल और स्वाइन फ्लू के लक्षण मिलते-जुलते होने के कारण केवल लक्षणों के आधार पर संक्रमण की पुष्टि नहीं की जा सकती। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होती है।
अबूझमाड़ के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, ताइक्वांडो में 8 पदक
नारायणपुर। अबूझमाड़ के खिलाड़ियों ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में आयोजित 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा ताइक्वांडो प्रतियोगिता में नारायणपुर के खिलाड़ियों ने कुल 8 पदक जीते।
बस्तर जोन की ओर से विश्वदीप्ति स्कूल के अंडर-17 वर्ग में 12 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। चंद्रकांत कश्यप और गौरव मलाहकार ने रजत पदक हासिल किया, जबकि देवांश, प्रेमांशु, शिवम, तिरुष, अंतरा, अनुप्रिया और सुलोचना ने कांस्य पदक जीते।
कोच आर. बलराम पुरी के अनुसार खिलाड़ियों को पिछले पांच वर्षों से लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताइक्वांडो के साथ कराटे, बॉक्सिंग और किकबॉक्सिंग का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। अब तक नारायणपुर के खिलाड़ी विभिन्न प्रतियोगिताओं में 574 पदक जीत चुके हैं।
दंतेवाड़ा में गड्ढे बने हादसे का कारण, बारिश में सड़क जानलेवा
दंतेवाड़ा। शहर की जर्जर सड़कें बारिश के दौरान वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं। शुक्रवार को दंतेवाड़ा मार्ग पर गड्ढे के कारण एक ई-रिक्शा अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में महिला चालक सड़क पर गिर गई, हालांकि उसे गंभीर चोट नहीं आई।
बारिश के बाद सड़क के गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। वहीं जल निकासी की व्यवस्था भी खराब होने से कई जगह पानी मुख्य सड़क पर जमा हो रहा है। स्थानीय लोगों ने सड़क की मरम्मत के साथ जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है।
NH-30 की बदहाली से सफर मुश्किल, 40 KM बढ़ रही दूरी
सुकमा। सुकमा को बस्तर के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला NH-30 बारिश के मौसम में बदहाल हो गया है। केशलूर से तोंगपाल के बीच कई जगह सड़क पर बड़े गड्ढे और कीचड़ जमा है। बारिश का पानी भरने से वाहन चालकों को सड़क और गड्ढों के बीच अंतर करना मुश्किल हो रहा है।
भारी वाहन कीचड़ में फंस रहे हैं, जबकि छोटे वाहन भी जोखिम उठाकर गुजरने को मजबूर हैं। कुछ वाहन चालक परेशानी से बचने के लिए सुकमा से दंतेवाड़ा होकर वैकल्पिक रास्ता अपना रहे हैं, जिससे करीब 40 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे यात्रियों का समय और ईंधन खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।
गड़दा में न्यूट्रल वाहन खुद चढ़ाई पर बढ़ता दिखा, चुंबकीय शक्ति या ऑप्टिकल इल्यूजन?
जगदलपुर। बस्तर के गड़दा गांव में सड़क पर खड़ी गाड़ियां इन दिनों लोगों के बीच कौतूहल का विषय बनी हुई हैं। कोड़ेनार से करीब छह किलोमीटर दूर पटेलपारा की सड़क पर वाहन को न्यूट्रल करने पर वह खुद आगे बढ़ता दिखाई देता है।
सड़क देखने में चढ़ाई वाली नजर आती है, इसलिए ग्रामीण इसे किसी चुंबकीय प्रभाव से जोड़कर देखते हैं। हालांकि अभी तक यहां किसी चुंबकीय केंद्र की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। भूगर्भ वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे ऑप्टिकल इल्यूजन यानी आंखों का भ्रम होने की संभावना अधिक हो सकती है। आसपास का पहाड़ी भू-दृश्य सड़क की वास्तविक ढलान को लेकर भ्रम पैदा कर सकता है। इलाके का वैज्ञानिक अध्ययन होने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।





