बस्तर। बस्तर संभाग में आज कृषि, प्रशासन, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी कई अहम खबरें सामने आई हैं। कोसारटेडा जलाशय से सिंचाई व्यवस्था, पीएससी परीक्षा की सख्ती, आदिवासी समाज का विरोध, घर वापसी अभियान और बढ़ती महंगाई तक कई मुद्दे चर्चा में हैं।
🌾 कोसारटेडा जलाशय किसानों की जीवनरेखा, अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना चुनौती
बस्तर ब्लॉक के ग्राम सालेमेटा स्थित कोसारटेडा जलाशय क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनरेखा माना जाता है। इस जलाशय से दो दर्जन से अधिक गांवों के करीब 11 हजार हेक्टेयर खेतों को खरीफ और रबी सीजन में सिंचाई मिलती है।
रबी फसल के समय पानी की सबसे अधिक जरूरत होती है, लेकिन अंतिम छोर के किसान सिंचाई से वंचित रह जाते हैं। यह जिले की एकमात्र माध्यम सिंचाई परियोजना है, जिससे अब पेयजल आपूर्ति भी की जा रही है। फ्लोराइड प्रभावित गांवों के लिए फिल्टर प्लांट लगाया गया है।
हालांकि जलाशय में पर्याप्त पानी है, लेकिन वितरण संतुलन बड़ी चुनौती बना हुआ है। किसानों ने मांग की है कि रबी सीजन में समान वितरण की ठोस व्यवस्था बनाई जाए, ताकि परियोजना का लाभ सभी गांवों तक पहुंचे।
📝 कड़ी निगरानी में संपन्न हुई पीएससी परीक्षा
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीक्षक पद की भर्ती परीक्षा जिले में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। शहर के दो केंद्रों पर सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक परीक्षा हुई।
कुल 1045 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 784 ने परीक्षा दी। प्रवेश से पहले मेटल डिटेक्टर जांच, जैमर की व्यवस्था और उड़नदस्ता निरीक्षण किया गया। निर्धारित समय के बाद प्रवेश नहीं दिया गया। पीएससी सदस्य ने व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। अभ्यर्थियों ने भी इंतजामों को संतोषजनक बताया।
🛑 ‘पंडुम’ शब्द पर आदिवासी समाज की आपत्ति
सरकारी कार्यक्रम के नाम को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने विरोध दर्ज कराया है। समाज का कहना है कि ‘पंडुम’ शब्द उनकी पारंपरिक आस्था से जुड़ा है, जिसे सरकारी आयोजन के नाम के तौर पर उपयोग करना भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।
समाज के प्रतिनिधियों ने ज्ञापन सौंपकर शब्द हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास के साथ संस्कृति का सम्मान भी जरूरी है। अब प्रशासन के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।
🐓 मुर्गा लड़ाई में हादसा, व्यक्ति गंभीर घायल
नारायणपुर जिले में पारंपरिक मुर्गा लड़ाई के दौरान बड़ा हादसा हुआ। खेल के दौरान मुर्गा उछलकर दर्शक पर जा गिरा। पैर में बंधा धारदार चाकू व्यक्ति को लग गया।
घटना में 44 वर्षीय व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ। हाथ और पेट के पास गहरे जख्म आए। घायल को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना ने ऐसे आयोजनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
🔄 सुकमा में 47 परिवारों की घर वापसी
सुकमा जिले के कोंटा ब्लॉक में दोरला समाज सम्मेलन के दौरान 47 परिवारों की मूल धर्म में वापसी कराई गई। समाज के नेताओं ने इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण बताया।
सम्मेलन में सामाजिक सुधार के लिए डीजे और शराब पर प्रतिबंध, आर्थिक सहयोग और विवाह नियम तय किए गए। युवाओं से संस्कृति को आगे बढ़ाने की अपील की गई।
👥 सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग को नई जिम्मेदारी
बस्तर में सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग की नई जिला कार्यकारिणी बनी। बसंत कश्यप को जिला अध्यक्ष चुना गया।
नई टीम को वन अधिकार, जल-जंगल-जमीन और अवैध जमीन खरीदी-बिक्री जैसे मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने की जिम्मेदारी दी गई। युवाओं में संगठन को मजबूत करने का उत्साह नजर आया।
🛕 सिरहासार चौक पर आस्था के रथ असुरक्षित
शहर का ऐतिहासिक सिरहासार चौक अव्यवस्था का शिकार हो रहा है। दशहरा और गोंचा पर्व के पवित्र रथ यहीं रखे जाते हैं, लेकिन अब वहां शराबखोरी और गंदगी फैल रही है।
बेरिकेट हटने से रथों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है। नागरिकों ने रथों को सुरक्षित स्थान पर रखने और संरक्षण की मांग की है।
💰 गन्ने की घटती खेती से महंगा हुआ गुड़
बस्तर में गन्ने की खेती घटने से गुड़ की कीमतें बढ़ गई हैं। बाजार में गुड़ 70 से 80 रुपये किलो बिक रहा है।
किसानों का कहना है कि गन्ने की खेती मेहनत वाली है, इसलिए वे दूसरी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। उत्पादन घटने से शक्कर कारखाने की योजना भी अधूरी रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही प्रोत्साहन मिले तो खेती फिर बढ़ सकती है।





