बस्तर। बस्तर संभाग में इन दिनों कई अहम मुद्दे सामने आए हैं। गांवों में तालाबों को भरने के लिए शुरू की गई गांव गंगा योजना के तहत लगाए गए करीब 200 बोरवेल लंबे समय से बंद पड़े हैं। वहीं मानसून की बेरुखी के कारण बस्तर में सामान्य से करीब 24 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। दंतेवाड़ा कलेक्ट्रेट में पहुंचा माउस डियर रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा गया। दूसरी ओर जर्जर आंगनबाड़ी भवन का छज्जा गिरने से छात्र घायल हुआ है। बीजापुर के एकलव्य स्कूल में शौचालयों की कमी और जगदलपुर दूरदर्शन स्टूडियो के सीमित उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
बंद पड़े 200 बोरवेल, गांव गंगा योजना बनी पुरानी याद
राज्य गठन के शुरुआती दौर में शुरू हुई गांव गंगा योजना अब बस्तर के गांवों में पुरानी व्यवस्था की याद बनकर रह गई है। वर्ष 2000 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य गर्मी के मौसम में सूखने वाले गांवों के तालाबों को बोरवेल के जरिए पानी से भरना था। इससे ग्रामीणों की निस्तारी जरूरतें पूरी होती थीं और मवेशियों को भी पानी उपलब्ध रहता था।
बस्तर में योजना के तहत स्थापित करीब 200 बोरवेल लंबे समय से बंद पड़े हैं। कई जगह मोटर और अन्य उपकरण खराब हो चुके हैं, जबकि कुछ स्थानों पर सामान चोरी होने की बात भी सामने आ रही है।
योजना के बंद होने का सीधा असर गांवों के तालाबों और उन पर निर्भर ग्रामीण जीवन पर पड़ा है। गर्मी के दिनों में कई गांवों में निस्तारी के लिए पानी जुटाना मुश्किल हो जाता है। तालाबों में पानी नहीं होने से स्थानीय मत्स्य पालन करने वाले लोगों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुरानी व्यवस्था की मरम्मत कर उसे दोबारा शुरू किया जाए तो नई योजना पर होने वाला खर्च भी बचाया जा सकता है। अब ग्रामीण बंद पड़े बोरवेल और अधूरी पड़ी व्यवस्था को फिर से सक्रिय करने की मांग कर रहे हैं।
199.1 मिलीमीटर बारिश की कमी, किसानों की बढ़ी चिंता
बस्तर में सावन का आधे से ज्यादा समय बीतने के बावजूद मानसून की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। जिले में अब तक 627.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा 826.5 मिलीमीटर है। इस लिहाज से बस्तर में करीब 199.1 मिलीमीटर यानी लगभग 24 प्रतिशत बारिश कम हुई है।
सावन में लगातार बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बनी रहती है, लेकिन इस बार बारिश के बीच लंबे अंतराल देखने को मिल रहे हैं। हालांकि कुछ इलाकों में हुई बारिश से फसलों को राहत मिली है, लेकिन नियमित बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बरकरार है।
खासकर धान की फसल के लिए खेतों में पर्याप्त पानी और नमी जरूरी है। बारिश की कमी का असर आगे चलकर खरीफ उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। किसानों की उम्मीद अब भादो में होने वाली बारिश पर टिकी है। आने वाले सप्ताह खेती के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
कुत्तों से बचकर कलेक्ट्रेट पहुंचा माउस डियर, वन विभाग ने जंगल में छोड़ा
दंतेवाड़ा कलेक्टोरेट परिसर में अचानक पहुंचे माउस डियर ने लोगों का ध्यान खींचा। बताया गया कि कुत्तों के पीछा करने से घबराया वन्यजीव अपनी जान बचाते हुए आबादी क्षेत्र में पहुंच गया था।
लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। इसके बाद वनकर्मी मौके पर पहुंचे और माउस डियर को सुरक्षित रेस्क्यू किया। पशु चिकित्सा अधिकारी से उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया, जिसमें उसे स्वस्थ पाया गया।
स्वास्थ्य सामान्य होने के बाद वन विभाग ने उसे बचेली क्षेत्र के उपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया। बैलाडीला की पहाड़ियों से वन्यजीवों के आबादी क्षेत्रों में भटककर आने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं।
माउस डियर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित वन्यजीव है। ऐसे में आबादी क्षेत्र में इसके मिलने पर सुरक्षित रेस्क्यू और प्राकृतिक आवास में वापसी जरूरी होती है।
जर्जर छज्जा गिरने से छात्र घायल, इलाज में ढाई लाख खर्च
बस्तर के नगर स्थित सुभाष चौक के जर्जर आंगनबाड़ी भवन का छज्जा गिरने से स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में कक्षा आठवीं में पढ़ने वाला छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे में छात्र के हाथ और पैर में गंभीर चोटें आई हैं।
हादसे के बाद छात्र को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसके इलाज में अब तक करीब ढाई लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। चिकित्सकों ने आगे भी उपचार और देखभाल की जरूरत बताई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक आंगनबाड़ी भवन लंबे समय से जर्जर हालत में था। भवन की स्थिति खराब होने के बावजूद समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई। हादसे के बाद लोगों ने क्षेत्र के सभी जर्जर सरकारी भवनों का सुरक्षा निरीक्षण कराने की मांग की है।
घायल छात्र के परिवार ने इलाज के बढ़ते खर्च को देखते हुए प्रशासन से आर्थिक सहायता की मांग की है।
440 बच्चों के लिए सिर्फ 4 शौचालय, एकलव्य स्कूल की व्यवस्था पर सवाल
बीजापुर। भैरमगढ़ स्थित पीएमश्री एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों के अनुसार बालक और बालिका छात्रावास में करीब 220-220 विद्यार्थी रह रहे हैं। इसके बावजूद प्रत्येक छात्रावास में केवल दो-दो शौचालय उपलब्ध हैं।
इनमें से भी कई शौचालय खराब बताए जा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों को रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ बच्चों को शौच के लिए छात्रावास परिसर से बाहर जाने की स्थिति बन रही है, जिससे सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बालिका छात्रावास में सैनिटरी पैड की नियमित उपलब्धता नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है। अभिभावकों ने आवासीय विद्यालय में स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग की है।
सर्व आदिवासी समाज ने भी विद्यार्थियों की समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग की है। वहीं सहायक आयुक्त ने शौचालय और सैनिटरी पैड से जुड़ी शिकायतों की जांच कराने और आवश्यक सुधार का आश्वासन दिया है।
करोड़ों का अत्याधुनिक स्टूडियो, लेकिन बस्तर के कार्यक्रमों का सीमित प्रसारण
जगदलपुर। धरमपुरा में बना अत्याधुनिक दूरदर्शन स्टूडियो अपनी क्षमता के मुकाबले सीमित उपयोग तक सिमटता नजर आ रहा है। करीब 34 साल पुराने इस स्टूडियो में बस्तर की स्थानीय संस्कृति और भाषाओं में कार्यक्रम तैयार किए जाते रहे हैं।
हल्बी, भतरी, गोंडी, मुरिया, माड़िया, छत्तीसगढ़ी और हिंदी में कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय कलाकारों को मंच मिलता रहा है। लेकिन वर्तमान में बस्तर अंचल के कार्यक्रमों के प्रसारण का समय बेहद सीमित बताया जा रहा है।
स्थानीय कलाकारों की मांग है कि बस्तर के कार्यक्रमों का प्रसारण सप्ताह में कम से कम चार दिन किया जाए, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं और संस्कृति को व्यापक मंच मिल सके।
स्टूडियो में कर्मचारियों की कमी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। बताया जा रहा है कि पहले यहां 50 से अधिक कर्मचारी कार्यरत थे, लेकिन अब कई विभागों में कर्मचारियों की संख्या काफी कम हो गई है। कर्मचारियों के स्थानांतरण के बाद एक महीने तक कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग तक नहीं हो सकी।
स्थानीय कलाकारों का सवाल है कि जब बस्तर की संस्कृति और भाषाओं को मंच देने के लिए इतना बड़ा स्टूडियो मौजूद है, तो उसका पूरा उपयोग क्यों नहीं हो रहा। अब मांग है कि स्टूडियो की तकनीकी क्षमता के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को भी नियमित प्रसारण का अवसर दिया जाए।





