दंतेवाड़ा: बैलाडीला 4 नंबर पहाड़ को लेकर आदिवासी असंतोष खुला
दंतेवाड़ा जिले में बैलाडीला के 4 नंबर पहाड़ को लेकर आदिवासी इलाकों में असंतोष खुलकर सामने आ गया है। भांसी में हुई बड़ी बैठक में तीन जिलों की 20 से अधिक पंचायतों से सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए।
ग्रामीणों ने खनन को जल, जंगल और जमीन पर सीधा हमला बताया। युवाओं और आदिवासी नेताओं ने चेतावनी दी कि जबरन खनन से हालात बिगड़ सकते हैं।
ग्रामीणों ने दशकों से जारी खनन के बावजूद स्थानीय लोगों को लाभ नहीं मिलने का आरोप लगाया। रोजगार, भर्ती और बुनियादी सुविधाओं में उपेक्षा की बात प्रमुखता से उठी।
कंपनियों द्वारा रखे गए विकास प्रस्तावों को पुराने और अविश्वसनीय बताते हुए ग्रामसभा को फर्जी करार दिया गया और दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग रखी गई।
अधिकारियों के स्पष्ट जवाब न देने से आक्रोश और बढ़ गया। बैठक में तीन जिलों के नदी-नालों और पर्यावरण पर खतरे की बात उठी।
अंत में पहाड़ बचाने के लिए संयुक्त समिति गठन और राजा बंगला पहाड़ की लीज निरस्त करने की मांग एक स्वर में रखी गई।
बस्तर: रेल विकास या सिर्फ खनिज ढुलाई?
जगदलपुर–रावघाट रेल लाइन को लेकर बस्तर में नाराजगी बढ़ती जा रही है। हजारों करोड़ की स्वीकृति के बावजूद काम शुरू न होना चिंता का विषय बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रेल लाइन यात्री सुविधा के बजाय खनिज ढुलाई तक सीमित रह सकती है। भविष्य में इसे केवल लौह अयस्क परिवहन मार्ग बनने की आशंका जताई जा रही है।
पुरानी रायपुर–धमतरी–कोंडागांव रेल लाइन को पुनः महत्व देने की मांग तेज हुई है। नागरिकों का तर्क है कि यह मार्ग किफायती और यात्री-अनुकूल हो सकता है।
दोहरीकरण के बिना नई ट्रेनों की संभावनाएं नगण्य बताई जा रही हैं। लोग बस्तर के गांव-कस्बों को जोड़ने वाली समग्र रेल नेटवर्क की मांग कर रहे हैं।
अब सवाल यही है—रेल बस्तर के लिए बनेगी या बस्तर से सिर्फ संसाधन ले जाएगी?
जगदलपुर: गौवंश सुरक्षा में समाज और प्रशासन की संयुक्त पहल
ग्राम मटेनार में बड़ी संख्या में गौवंशों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। अभियान में सामाजिक संगठनों, पुलिस और ग्रामीणों का सराहनीय सहयोग देखने को मिला।
सभी गौवंशों को सुरक्षित गौठान पहुंचाया गया। ग्रामीणों ने समय पर की गई कार्रवाई की सराहना की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
प्रशासन ने मामले में आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिलाया। यह अभियान गौ संरक्षण में सामूहिक जिम्मेदारी का उदाहरण बना।
बस्तर: बाघ की मौजूदगी की अफवाह, वन विभाग ने किया खंडन
कुरंदी जंगल में बाघ पकड़े जाने की अफवाह से क्षेत्र में दहशत फैल गई। बड़ी संख्या में लोग जंगल की ओर जाने को उत्सुक दिखे।
वन विभाग ने खबर को पूरी तरह भ्रामक बताया और स्पष्ट किया कि किसी बाघ को पिंजरे में नहीं पकड़ा गया है।
बताया गया कि वायरल तस्वीरें किसी अन्य स्थान की हैं। एहतियातन ग्रामीणों को रात में बाहर न निकलने और अकेले जंगल न जाने की सलाह दी गई है।
वन विभाग ने स्थिति नियंत्रण में होने की बात कहते हुए अफवाहों से बचने की अपील की है।
बस्तर: संभागीय बस स्टैंड में पार्किंग संकट
अंतर्राज्यीय बस स्टैंड में पार्किंग की कमी गंभीर समस्या बन चुकी है। यात्री और परिजन मजबूरी में बस परिसर में वाहन खड़े कर रहे हैं, जिससे अव्यवस्था बढ़ रही है।
नागरिकों का कहना है कि 15 वर्षों से पार्किंग की मांग अनसुनी की जा रही है।
बस स्टैंड का हिस्सा गैरेज और अवैध पार्किंग में तब्दील हो गया है। वाहन चोरी, विवाद और अव्यवस्थित संचालन का खतरा बढ़ गया है।
नागरिकों ने नगर निगम और प्रशासन से संयुक्त कार्रवाई की मांग की है।
बस्तर: धान खरीदी तेज, लेकिन उठाव की सुस्ती चिंता का कारण
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को एक माह से अधिक समय हो चुका है, लेकिन कई केंद्रों में उठाव की रफ्तार बेहद धीमी है।
लाखों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है। बारिश, चूहों और चोरी से नुकसान का खतरा बढ़ता जा रहा है।
परिवहन व्यवस्था समय पर नहीं पहुंच पा रही, जिससे संग्रहण केंद्रों पर दबाव बढ़ गया है।
प्रशासन निरीक्षण की बात कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नजर नहीं आ रहा। लंबे समय तक खुले में पड़ा धान गुणवत्ता खो सकता है, जिससे किसानों और खरीदी केंद्रों दोनों को नुकसान की आशंका है।





