जगदलपुर। बस्तर संभाग में सोमवार को विकास परियोजनाओं, पर्यावरण संरक्षण और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दे चर्चा में रहे। दंतेवाड़ा के हितालकुडुम में बोधघाट परियोजना के खिलाफ हजारों ग्रामीणों ने एकजुट होकर जमीन नहीं देने का ऐलान किया, वहीं अबूझमाड़ में जंगलों की कटाई को लेकर पर्यावरणविदों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
दंतेवाड़ा में आयोजित बैठक में 18 ग्राम पंचायतों के 56 गांवों के ग्रामीणों ने बोधघाट परियोजना का विरोध करते हुए कहा कि यह केवल जमीन का नहीं, बल्कि जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्तित्व का सवाल है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश हुई तो बड़े स्तर पर आंदोलन और धरना शुरू किया जाएगा।
इधर, बैलाडीला की खदानों से रिकॉर्ड लौह अयस्क परिवहन के बावजूद बस्तर में यात्री रेल सुविधाओं के विस्तार नहीं होने पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस क्षेत्र से रेलवे को सबसे अधिक राजस्व मिल रहा है, वहां यात्री सुविधाओं में भी समान निवेश होना चाहिए।
नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने प्रशासन को पत्र लिखकर अवैध कटाई रोकने, निगरानी बढ़ाने और भूमि सर्वेक्षण पूरा होने तक संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष नियंत्रण की मांग की है।
वहीं बस्तर जिले के करपावंड में जमीन सीमांकन के दौरान प्रशासनिक टीम पर हमले के मामले में पुलिस ने सरपंच समेत कई लोगों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा और हमला करने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया है। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
नगरनार पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है जिसने किसान के नाम पर 10 लाख रुपये का केसीसी ऋण स्वीकृत कराकर अधिकांश रकम हड़प ली थी। किसान को मामले की जानकारी तब हुई जब बैंक की ओर से जमीन नीलामी का नोटिस मिला। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से मोबाइल और एटीएम कार्ड बरामद किए हैं।
इस बीच पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले समाजसेवी सम्पत झा को राज्यपाल द्वारा “ट्री मैन” सम्मान से सम्मानित किया गया। वर्षों से चल रहे उनके वृक्षारोपण अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।
उधर कोंडागांव के केशकाल क्षेत्र में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पीड़िता की शिकायत के बाद कार्रवाई करते हुए आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।





