जगदलपुर। बस्तर में पर्यावरण, आजीविका, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था से जुड़ी कई महत्वपूर्ण खबरें सामने आई हैं। एक ओर इंद्रावती नदी का बढ़ता कटाव किसानों और पर्यावरण के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, वहीं बस्तर का कोसा उद्योग हजारों परिवारों की आर्थिक रीढ़ साबित हो रहा है। इसके अलावा नेतानार गांव में पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल, सोशल मीडिया से जुड़े अपराध में आरोपी की गिरफ्तारी, कैंसर जांच शिविर और पशु रेस्क्यू वाहन की बदहाली भी चर्चा में रही।
इंद्रावती नदी का कटाव बना खतरा
बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी लगातार अपने किनारों का कटाव कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार एनीकट निर्माण के बाद कई स्थानों पर जल प्रवाह का दबाव बढ़ा है, जिससे नदी तट की उपजाऊ भूमि तेजी से कट रही है। पौधरोपण अभियानों के बावजूद पर्याप्त संरक्षण नहीं होने से अधिकांश पौधे नष्ट हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि केवल पौधरोपण नहीं, बल्कि स्थायी संरक्षण योजना की जरूरत है।
कोसा उद्योग से हजारों परिवारों को रोजगार
बस्तर का रैली कोसा अब स्थानीय उत्पाद से आगे बढ़कर वैश्विक पहचान बना चुका है। महज पांच ग्राम वजन के एक कोसा से लगभग एक किलोमीटर लंबा धागा तैयार होता है। जापान, सिंगापुर और यूएई सहित कई देशों में बस्तर के कोसा वस्त्रों की मांग है। महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी ने इस उद्योग को और मजबूत किया है, जिससे हजारों परिवारों को रोजगार मिल रहा है।
नेतानार गांव की अनूठी पहल
पर्यावरण संरक्षण के लिए नेतानार गांव के ग्रामीणों ने श्रमदान कर आक्रामक खरपतवार क्रोमोलेना को हटाने का अभियान चलाया है। अब इस भूमि पर बांस, कटहल और अन्य उपयोगी पौधे लगाए जाएंगे। ग्रामीणों का मानना है कि इससे जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ आय के नए स्रोत भी विकसित होंगे।
सोशल मीडिया की दोस्ती बनी ब्लैकमेलिंग का जरिया
जगदलपुर में सोशल मीडिया पर हुई दोस्ती एक युवती के लिए मुसीबत बन गई। आरोप है कि युवक ने प्रेमजाल में फंसाकर युवती का विश्वास जीता, फिर होटल में दुष्कर्म कर आपत्तिजनक वीडियो बना लिए। शिकायत के बाद पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसके मोबाइल से आपत्तिजनक फोटो और वीडियो भी बरामद किए गए हैं।
कैंसर जांच शिविर में 6 मरीजों में पुष्टि
धरमपुरा में आयोजित निःशुल्क कैंसर जांच शिविर में 62 मरीजों की जांच की गई। जांच के दौरान छह मरीजों में कैंसर की पुष्टि हुई, जबकि नौ मरीज संदिग्ध पाए गए। अत्याधुनिक मोबाइल कैंसर स्क्रीनिंग वैन के जरिए महिलाओं की स्तन और सर्वाइकल कैंसर जांच भी की गई। चिन्हित मरीजों को आगे के उपचार के लिए रेफर किया गया है।
उपेक्षा का शिकार हुआ पशु रेस्क्यू वाहन
घायल और बीमार पशुओं की मदद के लिए वर्षों पहले उपलब्ध कराया गया विशेष पशु रेस्क्यू वाहन अब अनुपयोगी हालत में पड़ा है। कर्मचारियों की कमी और संचालन व्यवस्था नहीं होने के कारण वाहन वर्षों से खड़ा है। पशु कल्याण से जुड़ी यह महत्वपूर्ण सुविधा अब केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है।
बस्तर की ये खबरें एक ओर विकास और आजीविका की संभावनाएं दिखाती हैं, तो दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े करती हैं।





