May 17, 2026

बस्तर पंडुम 2026: जनजातीय संस्कृति का भव्य उत्सव, सुकमा ने दिखाई प्रशासनिक संवेदनशीलता

“बस्तर पंडुम 2026” बस्तर की आत्मा, उसकी परंपराओं और जनजातीय पहचान का भव्य उत्सव बनकर उभरा। यह आयोजन केवल सांस्कृतिक मंच नहीं था, बल्कि सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनजातीय संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण भी बना।

परंपराओं की संजीवनी

लालबाग मैदान में हुए समापन समारोह ने पूरे देश का ध्यान बस्तर की गौरवशाली विरासत की ओर आकर्षित किया। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की परिकल्पना को प्रशासन ने पूरी निष्ठा के साथ साकार किया। पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, जनजातीय वेशभूषा, खानपान और शिल्प—सब कुछ अपने मूल स्वरूप में सहेजा गया, जो इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।

सुकमा बना सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक

सुकमा जिला प्रशासन ने उत्कृष्ट समन्वय, प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता का परिचय दिया। जिले के कलाकारों ने बस्तर की आत्मा को मंच पर जीवंत कर दिया। छिंदगढ़ विकासखंड के किंदरवाड़ा निवासी गुंजन नाग और किरण नाग ने जनजातीय वेशभूषा प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर न केवल सुकमा, बल्कि पूरे बस्तर का मान बढ़ाया।

इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कलाकारों को स्मृति चिन्ह एवं 50 हजार रुपये का प्रोत्साहन चेक प्रदान किया, जो शासन की कलाकारों के प्रति सम्मान और विश्वास को दर्शाता है।

सहभागिता ने रचा इतिहास

सुकमा जिले से 12 विधाओं में 69 कलाकारों की सहभागिता ने यह साबित कर दिया कि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए मंच और अवसर जनजातीय प्रतिभाओं को नई उड़ान दे रहे हैं। यह सहभागिता केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, पहचान और भविष्य की उम्मीद का प्रतीक रही।

विकास के साथ संस्कृति का संरक्षण

बस्तर पंडुम 2026 यह संदेश देता है कि श्री विष्णु देव साय सरकार का विकास मॉडल केवल सड़क, भवन और योजनाओं तक सीमित नहीं है। यह जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक जड़ों और सामाजिक आत्मसम्मान को समान महत्व देता है। यह आयोजन साबित करता है कि जब प्रशासन संवेदनशील हो और नेतृत्व दूरदर्शी, तो विकास और परंपरा एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं।