रायपुर। पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम के ‘दिमागी नक्सली होने पर गर्व’ वाले कथित बयान को लेकर बस्तर शांति समिति ने कड़ी आपत्ति जताई है। समिति ने रायपुर प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता कर बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे नक्सल हिंसा का दंश झेल चुके बस्तरवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं।
‘बस्तर के लोगों ने दशकों तक झेली नक्सली हिंसा’
बस्तर शांति समिति के सदस्यों ने कहा कि बस्तर के लोग दशकों तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे हैं। इस दौरान कई परिवारों ने अपने परिजनों को खोया, घर उजड़े और बड़ी संख्या में लोगों ने हिंसा का दर्द झेला।
समिति ने कहा कि बस्तर के लिए नक्सलवाद महज कोई राजनीतिक विचारधारा नहीं है, बल्कि यह हजारों परिवारों के जीवन से जुड़ा गंभीर दर्द है। ऐसे में देश के पूर्व गृहमंत्री की ओर से नक्सलवाद को लेकर इस तरह का बयान देना बेहद संवेदनशील विषय है।
पूर्व गृहमंत्री से पूछा सवाल
समिति के सदस्यों ने सवाल उठाया कि बयान देने से पहले क्या पूर्व गृहमंत्री ने उन परिवारों की पीड़ा को समझने की कोशिश की, जिन्होंने नक्सली हिंसा में अपने परिजनों को खोया है?
उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने देश के गृहमंत्री के रूप में आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली हो, उससे नक्सलवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार बयान की अपेक्षा की जाती है।
सार्वजनिक माफी की मांग
बस्तर शांति समिति ने पी. चिदंबरम से उनके बयान को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। समिति ने कहा कि बस्तर अब नक्सल हिंसा से बाहर निकलकर शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
समिति के मुताबिक, ऐसे समय में नक्सलवाद के महिमामंडन या समर्थन वाला कोई भी बयान बस्तरवासियों की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है।
माफी नहीं मांगी तो दिल्ली में प्रदर्शन
बस्तर शांति समिति ने चेतावनी दी है कि यदि पी. चिदंबरम ने अपने बयान को लेकर माफी नहीं मांगी, तो समिति के सदस्य दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन करेंगे। समिति ने कहा कि बस्तर में शांति कायम रखने और क्षेत्र के विकास के लिए सकारात्मक माहौल जरूरी है।





