July 31, 2026

बस्तर एसपी कार्यालय में करोड़ों का वेतन घोटाला, तीन कर्मचारी गिरफ्तार, जांच में बड़े खुलासे

जगदलपुर। बस्तर पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय में वेतन आहरण से जुड़े एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। नियमित ऑडिट के दौरान सामने आई अनियमितताओं के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ी सामने आने पर तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

ऑडिट में सामने आई वित्तीय अनियमितताएं

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एसपी कार्यालय की विभिन्न शाखाओं का समय-समय पर आंतरिक (इंटरनल) और बाहरी (एक्सटर्नल) ऑडिट कराया जाता है। इसी प्रक्रिया के दौरान वेतन शाखा में अनियमितताओं का पता चला। इसके बाद डीएसपी मुख्यालय की ओर से प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसमें वित्तीय गड़बड़ियों की पुष्टि हुई।

सॉफ्ट कॉपी में बदलाव कर बढ़ाया जाता था वेतन

जांच में सामने आया कि वेतन शाखा में पदस्थ सहायक गिरीश राय वेतन आहरण से पहले सॉफ्ट कॉपी में बदलाव कर अपने और अपने साथियों के वेतन में कथित रूप से अवैध बढ़ोतरी करता था। पूछताछ के दौरान आरोपी ने इस तरीके को स्वीकार करने की बात पुलिस के समक्ष कही है।

इसके बाद पुलिस ने कार्यालय के कर्मचारी राजकुमार कत्लम और हेमंत मैथ्यू की भूमिका भी संदिग्ध पाई। तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

दो साल में 1.5 से 2 करोड़ रुपये की निकासी का अनुमान

पुलिस के मुताबिक, पिछले लगभग दो वर्षों के दौरान विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से करीब 1.5 से 2 करोड़ रुपये की अवैध निकासी किए जाने का अनुमान है। फिलहाल बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच जारी है।

‘लोन’ के नाम पर भी हुआ खेल

विवेचना के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। पुलिस के अनुसार, कुछ कर्मचारियों के खातों में लोन के नाम पर अतिरिक्त वेतन राशि जमा की जाती थी और बाद में वह रकम नकद वापस ले ली जाती थी।

पुलिस ऐसे सभी कर्मचारियों की सूची तैयार कर उनसे पूछताछ कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क और धन के प्रवाह का पता लगाया जा सके।

जांच का दायरा बढ़ सकता है

एसपी शलभ सिन्हा ने कहा कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, कार्रवाई का दायरा भी बढ़ाया जाएगा। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस कथित करोड़ों रुपये के वेतन घोटाले में अन्य लोगों की भी भूमिका है या नहीं।

इस मामले ने पुलिस विभाग की वित्तीय निगरानी और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।