बेमेतरा। जिले के बहुचर्चित बिरनपुर हिंसा मामले में जिला न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए 17 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
दोषमुक्त किए गए आरोपी
जिला न्यायालय ने जिन आरोपियों को दोषमुक्त किया, उनमें डकेश्वर सिन्हा उर्फ हरिओम, मनीष वर्मा, समारू नेताम, पूरन पटेल, राजकुमार निषाद, भोला निषाद, दूधनाथ साहू, अरुण रजक, चंदन साहू, होमेन्द्र नेताम, टाकेन्द्र साहू, राम निषाद, संजय कुमार साहू, चिंताराम साहू, लोकेश साहू, वरूण साहू और राजेश साहू शामिल हैं। सभी आरोपी बेमेतरा जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से संबंधित हैं और उम्र 18 से 68 वर्ष के बीच है।
बिरनपुर हिंसा का संक्षिप्त विवरण
यह हिंसा दो बच्चों की मामूली लड़ाई से शुरू हुई थी, जो देखते-देखते हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच गंभीर झड़प में बदल गई। 8 अप्रैल 2023 को साजा विधायक ईश्वर साहू के पुत्र भुनेश्वर साहू (22) की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।
घटना के बाद तनाव बढ़ गया और 10 अप्रैल को विश्व हिंदू परिषद ने छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया। झड़प में मुस्लिम समुदाय के रहेम (55) और उनके पुत्र ईदुल मोहम्मद (35) की हत्या भी हुई। प्रशासन ने धारा 144 लागू की, जो लगभग दो सप्ताह तक जारी रही।
जांच और साक्ष्य
साजा थाना में कुल 173 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं (302, 147, 148, 149, 153(3), 201, 109, 34 भादवि) में मामला दर्ज किया गया था। 64 अभियोजन साक्षियों के बयान के बाद न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए 17 आरोपियों को छोड़ दिया।
सीबीआई की जांच में यह खुलासा हुआ कि भीड़ ने केवल भुनेश्वर साहू पर हमला नहीं किया, बल्कि घटनास्थल पर पहुंची पुलिस पर भी पत्थरबाजी की। सब-इंस्पेक्टर बिनुराम ठाकुर और उनके स्टाफ ने भीड़ से भुनेश्वर को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने पुलिस पर भी हमला किया।
CBI द्वारा जोड़े गए नए आरोपी
मामले की शुरुआत में पुलिस ने 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। बाद में जब यह मामला सीबीआई को सौंपा गया, तो जांच में 6 और आरोपी जोड़े गए, जिससे कुल आरोपी 18 हुए। इन पर अलग-अलग आरोप हैं, जिसमें पुलिस पर हमला करने का आरोप भी शामिल है।
बिरनपुर हिंसा मामले ने छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था और राजनीति दोनों पर गहरा असर डाला था और पूरे देश में इसकी चर्चा हुई।





