भानुप्रतापपुर। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शामिउल्ला अंसारी नामक जिंदा मतदाता को फॉर्म-7 के जरिए मृत घोषित कर उसका नाम मतदाता सूची से हटाने का आवेदन किया गया।
शामिउल्ला अंसारी ने कहा, “मैं जिंदा हूं, फिर मेरे मृत होने का आवेदन कैसे दिया गया?” उनका कहना है कि वे रोज़ भानुप्रतापपुर के मुख्य चौक पर मौजूद रहते हैं और वर्षों से उसी स्थान पर निवास कर रहे हैं। उन्होंने किसी को ऐसा आवेदन देने का निर्देश नहीं दिया और न ही उन्हें इसकी कोई जानकारी है।

आवेदन में शामिल नाम के आधार पर जब फूल सिंह (वार्ड क्रमांक 2) से संपर्क किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसा कोई आवेदन नहीं दिया और न ही इस मामले से उनका कोई संबंध है।
इस घटना ने राजनीतिक बयानबाजी को भी हवा दी है। क्षेत्र की विधायक सावित्री मंडावी ने आरोप लगाया कि भानुप्रतापपुर में कुछ लोगों के नाम हटाने के लिए फॉर्म बांटे गए हैं। उन्होंने बताया कि रामपुर पुरी क्षेत्र में आदिवासी समुदाय के कम से कम 40 लोगों के नाम हटाने के लिए आवेदन किए गए हैं। विधायक ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
कलेक्टर ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फॉर्म-7 के तहत मिले आवेदन में अलग-अलग तरीकों से नाम हटाने का प्रयास किया गया है। प्रशासन जांच कर रहा है कि किन्हीं शरारती तत्वों द्वारा आवेदन क्यों दिए गए। उन्होंने कहा कि अधिकांश आवेदन जिनके नाम 2002 की सूची में हैं, उनमें कार्रवाई की संभावना कम है। यदि इसमें किसी तरह से सरकार को बदनाम करने का प्रयास पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
वर्तमान स्थिति: प्रशासनिक जांच जारी है और जल्द ही मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।





