July 29, 2026

भानुप्रतापपुर में बदले बस्तर की दो तस्वीरें: 21 साल बाद रावघाट रेल परियोजना का ट्रायल सफल, आत्मसमर्पित नक्सलियों ने पहली बार किया रेल सफर

भानुप्रतापपुर (कांकेर)। कांकेर जिले में आज बस्तर के बदलते दौर की दो महत्वपूर्ण तस्वीरें सामने आईं। एक ओर वर्षों से प्रतीक्षित रावघाट रेल परियोजना ने अंतिम चरण में सफलता हासिल की, वहीं दूसरी ओर आत्मसमर्पित नक्सली पहली बार रेल में सफर करते नजर आए। दोनों घटनाएं क्षेत्र में विकास और परिवर्तन की नई कहानी बयां कर रही हैं।

रावघाट रेल परियोजना का सफल ट्रायल

छत्तीसगढ़ की महत्वाकांक्षी रावघाट रेल परियोजना का अंतिम चरण आज सफलतापूर्वक पूरा किया गया। ताडोकी से रावघाट तक पहली बार ट्रायल रन किया गया। रावघाट इस परियोजना का अंतिम पड़ाव माना जाता है।

करीब 2007 में शुरू हुई यह परियोजना लगभग 21 वर्षों बाद अपने पूर्णता चरण तक पहुंची है। इस दौरान सबसे बड़ी चुनौती नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था रही। परियोजना के दौरान कई सुरक्षाबलों के जवानों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने अपनी जान भी गंवाई।

आत्मसमर्पित नक्सलियों का रेल सफर

दूसरी ओर भानुप्रतापपुर में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों को जिला पुलिस द्वारा रेल यात्रा कराई गई। उन्होंने पहली बार ट्रेन में सफर किया, जिससे उनके चेहरों पर उत्साह और खुशी साफ झलक रही थी।

बदलते बस्तर की तस्वीर

एक समय था जब नक्सली गतिविधियों के कारण रेल सेवाएं प्रभावित होती थीं और विकास परियोजनाएं बाधित रहती थीं। लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। जहां कभी विकास का विरोध होता था, वहीं अब वही लोग विकास की इस नई दिशा से जुड़ते नजर आ रहे हैं।

यह घटना केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि बस्तर में बदलते विश्वास, शांति और विकास की मजबूत तस्वीर पेश करती है।