July 23, 2026

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में छत्तीसगढ़ में उबाल, 1 करोड़ मुआवजे की मांग

लोरमी: बिहार के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की गूंज अब छत्तीसगढ़ तक पहुंच गई है। लोरमी में ब्राह्मण समाज के नेतृत्व में सर्व समाज की आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न समाजों के पदाधिकारियों और नागरिकों ने कथित एनकाउंटर की कड़ी निंदा करते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाई।

बैठक में भरत तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित कर मौन रखा गया। वक्ताओं ने घटना को संदेहास्पद बताते हुए कहा कि इससे देशभर में लोगों के बीच आक्रोश है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता के रूप में 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके लिए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन तैयार किया गया है, जिसे प्रशासन के माध्यम से जल्द सौंपा जाएगा।

क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर मामला?

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित बिलौटी गांव में 17 जून को पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि मुठभेड़ की स्थिति में आत्मरक्षा के लिए गोली चलाई गई थी।

वहीं, परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि भरत तिवारी ने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मारी गई। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें भरत तिवारी के आत्मसमर्पण का दावा किया जा रहा है। इसके बाद पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठने लगे।

पांच पुलिसकर्मी निलंबित

मामले में बिहार पुलिस के एडीजी सुधांशु कुमार ने स्वीकार किया कि 16 जून को भरत तिवारी से बातचीत करने गए पुलिस अधिकारियों द्वारा स्थिति को सही ढंग से नहीं संभाला गया, जो गंभीर चूक थी। इस लापरवाही के लिए एक थाना प्रभारी, दो सब-इंस्पेक्टर, एक एएसआई और एक कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है।

मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट

मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने बिहार के मुख्य सचिव, डीजीपी और भोजपुर एसपी से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित की गई है।