March 3, 2026

भारतमाला मुआवजा घोटाला : ACB ने 3 पटवारियों के खिलाफ पेश किया पूरक चालान, शासन को ₹40 करोड़ से ज्यादा का नुकसान

रायपुर। भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार तीन लोकसेवकों के खिलाफ विशेष न्यायालय (ACB), रायपुर में प्रथम पूरक चालान पेश किया है। चालान में खुलासा हुआ है कि आरोपियों की वजह से शासन को करीब ₹39.65 करोड़ से अधिक की आर्थिक क्षति हुई है।

एसीबी के अनुसार यह घोटाला भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्टनम प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर के भू-अर्जन में किया गया था। फिलहाल मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ विवेचना जारी है।


⚖️ 29 अक्टूबर 2025 को हुई थी गिरफ्तारी

एसीबी ने जिन तीन लोकसेवकों को गिरफ्तार किया था, उनमें शामिल हैं—

  • दिनेश पटेल – तत्कालीन पटवारी, हल्का नं. 49, ग्राम नायकबांधा
  • लेखराम देवांगन – तत्कालीन पटवारी, हल्का नं. 24, ग्राम टोकरो
  • बसंती घृतलहरे – तत्कालीन पटवारी, ग्राम भेलवाडीह

तीनों को 29 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इनके खिलाफ अपराध क्रमांक 30/2025 दर्ज है, जिसमें भ्र.नि.अ. 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7C, 12 तथा भादवि की धारा 409, 467, 471, 420, 120-B के तहत मामला पंजीबद्ध है।


💰 पूरक चालान में बड़ा खुलासा

एसीबी द्वारा पेश पूरक चालान में बताया गया कि आरोपियों की भूमिका से शासन को कुल ₹39,65,89,257 की आर्थिक क्षति प्रथम दृष्टया सामने आई है।

प्रकरण में आरोप है कि लोकसेवकों और मुआवजा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों ने आपराधिक षड्यंत्र कर—

  • शासन द्वारा अर्जित भूमि को दोबारा शासन को बेचकर मुआवजा लेना
  • निजी भूमि का गलत मुआवजा बनवाना
  • बैकडेट में बटवारा और नामांतरण करना
  • भूमि स्वामी के स्थान पर किसी अन्य को मुआवजा दिलाना
  • कृत्रिम उपखंड बनाकर अधिक भुगतान कराना

जैसे गंभीर कृत्य किए।


🧾 अभियुक्तों की भूमिका

▶️ दिनेश पटेल की भूमिका

तत्कालीन पटवारी दिनेश पटेल ने खाता दुरुस्ती, प्रपत्र-10 और आपत्ति निराकरण के माध्यम से पद का दुरुपयोग किया। अवार्ड के समय अधिग्रहीत भूमि को कृत्रिम उपखंडों में विभाजित दिखाकर अधिक मुआवजा दिलाया गया।
👉 इससे शासन को लगभग ₹30,82,14,868 की क्षति हुई।


▶️ लेखराम देवांगन की भूमिका

पटवारी लेखराम देवांगन ने भुगतान प्रतिवेदन और दस्तावेजों में हेराफेरी कर मूल खसरों को कृत्रिम उपखंडों में दर्शाया, जिससे वास्तविक देय राशि से कई गुना अधिक मुआवजा भुगतान कराया गया।
👉 शासन को करीब ₹27,16,26,925 का नुकसान हुआ।


▶️ बसंती घृतलहरे की भूमिका

पटवारी बसंती घृतलहरे ने अवार्ड चरण में मूल खसरों को कृत्रिम उपखंडों में विभाजित दर्शाकर अधिक भुगतान की स्थिति बनाई।
👉 इससे शासन को लगभग ₹1,67,47,464 की क्षति हुई।


🚨 अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई जारी

एसीबी अधिकारियों के मुताबिक यह केवल शुरुआती चरण है। घोटाले में शामिल अन्य लोकसेवकों और लाभार्थियों की भूमिका की जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।