September 4, 2026

भिलाई निगम की दुकानों के नामांतरण और लीज नवीनीकरण के नए नियम जारी, 30 हजार रुपए तक देना होगा शुल्क

भिलाईनगर। भिलाई नगर निगम ने निगम क्षेत्र की दुकानों के वार्षिक किराया, नामांतरण शुल्क और लीज नवीनीकरण को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दुकान के विक्रय या हस्तांतरण की स्थिति में आवंटी को निकाय में निर्धारित नामांतरण शुल्क जमा करना होगा। यह शुल्क नगर निगम की जनसंख्या के आधार पर तय किया गया है।

जनसंख्या के आधार पर नामांतरण शुल्क तय

जारी दिशा-निर्देश के अनुसार 3 लाख से कम आबादी वाले निकायों में नामांतरण शुल्क 20 हजार रुपए, 3 लाख से 10 लाख तक की आबादी वाले निकायों में 25 हजार रुपए और 10 लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगमों में 30 हजार रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है।

हालांकि, आवंटी की मृत्यु होने की स्थिति में उसके वारिसों के पक्ष में नामांतरण कराने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।

नामांतरण के लिए ये प्रक्रिया जरूरी

नामांतरण के लिए आवंटी को लीज डीड होने के दो वर्ष बाद संयुक्त आवेदन करना होगा। इसके साथ निर्धारित शुल्क जमा करना और समाचार पत्र में 30 दिनों के लिए दावा-आपत्ति प्रकाशित कराना अनिवार्य होगा।

नगर निगम की ओर से किराये और लीज की व्यवस्था भी निर्धारित प्रावधानों के अनुसार लागू की जाएगी। 10 लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगमों के लिए वार्षिक किराया स्वीकृत प्रीमियम राशि के 7.20 प्रतिशत के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।

हर तीन साल में 5 प्रतिशत बढ़ेगा किराया

लीज डीड में किराये में वृद्धि का भी प्रावधान रखा जाएगा। प्रत्येक तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद किराये में 5 प्रतिशत चक्रवृद्धि वृद्धि की जाएगी।

वहीं, लीज की अवधि पूरी होने के बाद नवीनीकरण की व्यवस्था भी निर्धारित की गई है। 15 वर्ष की लीज अवधि पूरी होने पर अगले 15 वर्ष के लिए लीज का नवीनीकरण किया जाएगा। नवीनीकरण के समय किराये में 25 प्रतिशत वृद्धि का प्रावधान रहेगा।

शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की आय से नागरिक सुविधाओं पर खर्च

नगर निगम के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स से होने वाली आय का उपयोग भी निर्धारित व्यवस्था के तहत किया जाएगा। पहले ऋण की अदायगी की जाएगी और इसके बाद बची राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा नागरिक सुविधाओं के विकास पर खर्च किया जाएगा।

इस राशि का उपयोग सड़क, नाली, उद्यान और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास एवं रखरखाव में किया जाएगा। इससे निगम क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।