March 5, 2026

कवर्धा: भोरमदेव की पहाड़ियों में गूंजी बाघों की दहाड़, शावकों के साथ नजर आया कुनबा

कवर्धा | वन्यजीव प्रेमियों और छत्तीसगढ़ के पर्यावरण संरक्षण के लिए एक सुखद खबर सामने आई है। कबीरधाम जिले का भोरमदेव अभ्यारण्य बाघों के नए ‘पसंदीदा घर’ के रूप में उभर रहा है। वन विभाग के ट्रैप कैमरों ने बाघ, बाघिन और उनके शावकों की बेखौफ विचरण करती हुई दुर्लभ तस्वीरें कैद की हैं।

कान्हा से भोरमदेव का ‘कनेक्शन’

वन मंडल अधिकारी (DFO) निखिल अग्रवाल के अनुसार, वर्तमान में जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में 4 से अधिक बाघ-बाघिन सक्रिय हैं। इनकी मौजूदगी प्रभूझोल, चिल्फी, बेंदा और झलमला जैसे आंतरिक इलाकों में दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की संख्या बढ़ने के कारण, बाघ अब शांत और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भोरमदेव का रुख कर रहे हैं।

प्रमुख बिंदु: जो इस खबर को खास बनाते हैं

  • शावकों की मौजूदगी: बाघिन का शावकों के साथ लंबे समय तक यहाँ रुकना साबित करता है कि यहाँ का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) उनके प्रजनन और जीवन के लिए अनुकूल है।
  • सुरक्षा प्रोटोकॉल: विभाग ने बाघों की सटीक लोकेशन को गोपनीय रखा है ताकि शिकारियों से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। गश्त बढ़ा दी गई है।
  • प्राकृतिक संतुलन: जंगल में शिकार की उपलब्धता और पगमार्क (Pugmarks) का मिलना एक स्वस्थ वन्यजीव चक्र का संकेत है।

पर्यटन को लगेंगे पंख: अप्रैल-मई से सफारी

भोरमदेव को अब पर्यटन के नक्शे पर बड़ी पहचान मिलने वाली है। वन विभाग अप्रैल या मई से यहाँ जंगल सफारी शुरू करने की तैयारी में है।

  • संचालन: गुजरात की एक अनुभवी कंपनी को इसकी जिम्मेदारी दी गई है।
  • बुकिंग: पर्यटकों के लिए ऑनलाइन टिकट की सुविधा उपलब्ध होगी।
  • रोजगार: इस पहल से स्थानीय युवाओं को गाइड और अन्य सेवाओं के रूप में रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

“बाघों की स्थायी वापसी यह साबित करती है कि संरक्षण के प्रयास सफल हो रहे हैं। यह न केवल गर्व का विषय है, बल्कि इको-टूरिज्म के लिए एक नया अध्याय भी है।”