📰 किसानों के सुरक्षित भविष्य को लेकर भोरमदेव शक्कर कारखाने की बड़ी पहल
सहकारिता को मजबूती देने और किसानों के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने की दिशा में भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना मर्यादित, कवर्धा ने एक अहम कदम उठाया है। कारखाना प्रबंधन ने अपने सदस्य गन्ना किसानों के नाम अपील जारी करते हुए कहा है कि यह कोई चेतावनी नहीं, बल्कि कारखाने और किसानों दोनों के अस्तित्व को बचाने का साझा अवसर है।
प्रबंधन ने किसानों से आग्रह किया है कि वे सर्वे के अनुरूप गन्ना आपूर्ति कर कारखाने को सुचारू संचालन में सहयोग दें।
🚜 गन्ना आपूर्ति में कमी से बढ़ी चिंता
कारखाना प्रबंधन द्वारा जारी पत्र के अनुसार, पिछले तीन पेराई सत्रों — 2023-24, 2024-25 और वर्तमान 2025-26 — में सर्वे अनुमान के अनुरूप गन्ना प्राप्त नहीं हो सका है।
गन्ने की कमी के कारण कारखाने की पूरी पेराई क्षमता का उपयोग नहीं हो पा रहा, जिससे उत्पादन, राजस्व और आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर अंततः किसानों की आय और भुगतान प्रणाली पर भी पड़ता है।
📜 सहकारी नियम क्या कहते हैं
प्रबंधन ने सहकारी उपविधियों का उल्लेख करते हुए बताया कि—
- उपविधि धारा 07(02)(घ) के अनुसार सदस्य किसानों को अपना गन्ना कारखाने में देना अनिवार्य है।
- धारा 09(क)(05) के तहत यदि कोई किसान लगातार सर्वे अनुसार गन्ना आपूर्ति नहीं करता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है।
प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि इन नियमों का उद्देश्य किसानों को दंडित करना नहीं, बल्कि संस्था की निरंतरता और किसानों के दीर्घकालिक हितों की रक्षा करना है।
✅ गन्ना आपूर्ति बढ़ने से किसानों को होंगे ये लाभ
यदि किसान सर्वे के अनुसार गन्ना आपूर्ति करते हैं तो—
- कारखाना पूरी क्षमता से चलेगा।
- पेराई अवधि बढ़ेगी और उत्पादन में वृद्धि होगी।
- किसानों को भुगतान तेजी और सुरक्षित रूप से मिलेगा।
- रियायती शक्कर, प्रेस मड और उन्नत बीज की सुविधा मिलती रहेगी।
- आधुनिक खेती का प्रशिक्षण निरंतर मिलता रहेगा।
- स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
प्रबंधन ने कहा कि मजबूत कारखाना ही किसानों की स्थिर आय का आधार बनता है।
🤝 साझा जिम्मेदारी की अपील
कारखाना प्रबंधन ने सभी सदस्य किसानों से अपील की है कि वे सहकारिता की भावना को समझें और सर्वे के अनुरूप गन्ना आपूर्ति कर भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने को किसानों की उन्नति का मजबूत स्तंभ बनाए रखें।
प्रबंधन का मानना है कि किसान और कारखाना एक-दूसरे पर निर्भर हैं, और दोनों का भविष्य साझा प्रयास से ही सुरक्षित रह सकता है।





