September 6, 2026

भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, चुनाव याचिका खारिज करने की मांग नामंजूर

बिलासपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उनकी जीत को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त करने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि भूपेश बघेल चुनाव याचिका के ट्रायल के दौरान अपने सभी कानूनी और तथ्यात्मक तर्क रखने के लिए स्वतंत्र होंगे।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की। यह चुनाव याचिका भाजपा नेता एवं भूपेश बघेल के चुनावी प्रतिद्वंद्वी विजय बघेल द्वारा दायर की गई है।

क्या है मामला?

चुनाव याचिका में आरोप लगाया गया है कि 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान से 48 घंटे पहले लागू ‘साइलेंस पीरियड’ में भूपेश बघेल ने रोड शो किया, जो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 का उल्लंघन है।

भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि आरोप सही मान भी लिया जाए, तब भी यह केवल चुनाव संबंधी अपराध हो सकता है, लेकिन इसे धारा 123 के तहत “भ्रष्ट आचरण” नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि कथित घटना का चुनाव परिणाम पर कोई वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि भूपेश बघेल ने लगभग 20 हजार मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि कथित उल्लंघन से चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ या नहीं, यह तथ्य का विषय है और इसका निर्धारण साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए भूपेश बघेल की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, अदालत ने उन्हें यह स्वतंत्रता दी कि वे चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान अपने सभी कानूनी और तथ्यात्मक तर्क हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।

यह मामला पाटन विधानसभा सीट से वर्ष 2023 में भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है, जिसमें भाजपा नेता विजय बघेल ने 16 नवंबर 2023 को कथित रोड शो को लेकर चुनाव नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

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