September 4, 2026

बिलासपुर: अदालतों के फैसलों और FIR की भाषा में होगा बदलाव, महिलाओं के लिए असंवेदनशील शब्दों पर रोक

बिलासपुर। प्रदेश की अदालतों की कार्यशैली, न्यायिक फैसलों की भाषा और पुलिस की एफआईआर-चार्जशीट की ड्राफ्टिंग में अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद छत्तीसगढ़ में अदालतों और प्रशासन के लिए विस्तृत हैंडबुक एवं आदेश जारी किए गए हैं। राज्य के सभी 24 जिला एवं सत्र न्यायालयों, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, राज्य एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मुख्य सचिव, गृह विभाग, डीजीपी और महिला एवं बाल विकास विभाग को आदेश की प्रतियां भेजकर तत्काल पालन सुनिश्चित करने कहा गया है।

दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आपराधिक पुनरीक्षण मामले में की गई असंवेदनशील और आपत्तिजनक टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद रिटायर्ड जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की गई। समिति की रिपोर्ट ‘Judgment and Gender Stereotypes and Compassion in Writing Judgments’ को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की अदालतों में लागू करने के निर्देश दिए हैं।

नई व्यवस्था के तहत महिलाओं के लिए ‘रखैल’, ‘चरित्रहीन’ जैसे रूढ़िवादी और अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल से बचना होगा। साथ ही अदालत में आने वाले पीड़ितों और गवाहों को सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

तय की गईं पांच प्रमुख व्यवस्थाएं

1. गवाहों और पीड़ितों को मिलेगा सम्मानजनक माहौल
अदालत में आने वाले पीड़ितों और गवाहों को घंटों इंतजार कराने के बजाय उनके बैठने के लिए कुर्सी, पानी और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। उन्हें अदालत में आने वाले ‘मेहमान’ की तरह सम्मान देने पर जोर दिया गया है।

2. FIR और चार्जशीट की भाषा बदलेगी
डीजीपी को निर्देश दिए गए हैं कि एफआईआर और चार्जशीट तैयार करते समय महिलाओं के पहनावे, चाल-चलन या चरित्र को लेकर रूढ़िवादी और आहत करने वाले शब्दों का इस्तेमाल न किया जाए।

3. यौन अपराध और POCSO मामलों में गोपनीयता
यौन अपराधों और पॉक्सो मामलों की सुनवाई इन-कैमरा की जाएगी। पीड़िता की पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखने के निर्देश दिए गए हैं।

4. न्यायिक अधिकारियों और पुलिस की होगी ट्रेनिंग
बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी को न्यायिक अधिकारियों, सरकारी वकीलों और पुलिस अधिकारियों के लिए विशेष ओरिएंटेशन एवं संवेदनशीलता कार्यशालाएं आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई है।

5. पीड़िताओं को जल्द मिले अंतरिम मुआवजा
यौन उत्पीड़न और एसिड अटैक की पीड़िताओं को नालसा विक्टिम कंपनसेशन स्कीम 2018 के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से त्वरित अंतरिम राहत और पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

कोर्ट और थानों में पीड़ित-केंद्रित व्यवस्था पर जोर

नई व्यवस्था का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को अधिक संवेदनशील, गरिमापूर्ण और पीड़ित-केंद्रित बनाना है। अदालतों और पुलिस थानों में महिलाओं के कपड़ों, चरित्र या निजी जीवन को लेकर सवाल उठाने वाली भाषा से बचने पर जोर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब एफआईआर दर्ज करने से लेकर चार्जशीट और न्यायिक फैसलों तक सम्मानजनक एवं संवेदनशील भाषा के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जाएगी।