May 18, 2026

बेटी ने निभाई बेटे की जिम्मेदारी : मां को कंधा देकर खुद दी मुखाग्नि, भावुक हुआ पूरा गांव

बिलासपुर : समाज की परंपराओं और रूढ़ियों से अलग एक भावुक कर देने वाला दृश्य उस समय देखने को मिला, जब एक बेटी ने अपनी मां को अंतिम विदाई देने का साहसिक निर्णय लिया। आमतौर पर अंतिम संस्कार की रस्में बेटे निभाते हैं, लेकिन इस बेटी ने परंपरा तोड़ते हुए अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट पर पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार किया। पूरा मामला बिलासपुर जिले के परसाही गांव का है।

ग्राम परसाही निवासी 70 वर्षीय भूरी बाई चौहान का निधन हो गया। उनके परिवार में दो बेटियां हैं। मां के निधन के बाद जहां परिवार गहरे दुख में था, वहीं घर में बेटा नहीं होने के कारण अंतिम संस्कार को लेकर चिंता भी थी। ऐसे में भूरी बाई की बड़ी बेटी ने साहस दिखाते हुए मां के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी खुद उठाई।

बड़ी बेटी ने अपनी छोटी बहन के साथ मिलकर पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार की तैयारियां कीं। दोनों बहनों ने मां की अर्थी को कंधा देकर श्मशान घाट तक पहुंचाया, जिसके बाद बड़ी बेटी ने ही मां को मुखाग्नि दी।

अंतिम संस्कार के दौरान नम हो गईं सभी की आंखें

मां के निधन के बाद परिवार शोक में डूबा हुआ था। ऐसे कठिन समय में बेटी ने खुद को संभालते हुए मां के प्रति अपना अंतिम कर्तव्य निभाया। नम आंखों और भारी मन से उसने मां को मुखाग्नि दी। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं और माहौल बेहद भावुक हो उठा।

मां ने बेटियों को बेटे की तरह पाला

परिवार को करीब से जानने वाले लोगों के अनुसार भूरी बाई ने अपनी दोनों बेटियों को हमेशा बेटे की तरह पाला। उन्होंने बेटियों को जीवन में आगे बढ़ने और मजबूत बनने की सीख दी। शायद यही संस्कार थे, जिन्होंने इस कठिन घड़ी में बेटी को इतना साहस दिया कि वह मां को अंतिम विदाई देने के लिए खुद आगे खड़ी हो गई।

इस घटना ने समाज को एक गहरा संदेश दिया है कि रिश्तों का मूल्य किसी परंपरा से बड़ा होता है। बेटियां केवल परिवार की शान ही नहीं, बल्कि हर जिम्मेदारी निभाने का साहस और सामर्थ्य भी रखती हैं।